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Hichki Movie Review: टीचर के किरदार में दमदार हैं रानी, बस निराश करती है कहानी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 23 , 2018 , 13:45 IST

काफी समय से बड़े परदे से दूर रही बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुख़र्जी करीब 4 साल बाद फिल्म हिचकी से कमबैक कर रहीं हैं। फिल्म हिचकी आज रिलीज़ हो चुकी है। हिचकी एक टीचर के संघर्ष की कहानी है। आम ज़िन्दगी पर आधारित ये कहानी न आपको सिर्फ एंटरटेन करेगी बल्कि ज़िन्दगी से जुडी कई एहम बातें भी सिखाएगी। 

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फिल्म की कहानी-

हिचकी एक लड़की की कहानी है, जो जिंदगी में हुए एक बहुत बड़े नुकसान को मौके में तब्दील करती है। लड़की को बार-बार हिचकी (टॉरेट सिंड्रोम) आती है। वह टीचर बनना चाहती हैं लेकिन उसे ये कहा जाता है कि टीचिंग में उसके लिए जॉब मिलना बहुत मुश्किल है, इस बीमारी के चलते 24 स्कूल नौकरी देने से मना कर देते हैं।

आखिरकार उन्हें नौकरी मिल जाती है और उन्हें 14 बस्ती के बच्चों को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी दे दी जाती है। रानी इन 14 बच्चों की ज़िंदगी कैसे बदलेंगी यही फिल्म की कहानी है। 'हिचकी' ‘फ्रंट ऑफ दि क्लास’ (2008) हॉलीवुड फिल्म से इंस्पायर है।

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डायरेक्शन-

डायरेक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म 'हिचकी' में कुछ भी नयापन नहीं है। फिल्म देखते समय आगे क्या होने वाले ये पहले ही समझ आ जाता है। फिल्म गरीब बच्चों की कहानी है जो लाइफ में कुछ नहीं करना चाहते और इनकी जिंदगी एक टीचर बदलती है। सिद्धार्थ कहानी को स्क्रीन पर सही तरीके से नहीं उतार पाए। फिल्म काफी काल्पनिक है। असल जिंदगी में ऐसा होता नहीं है। फिल्म का क्लाइमैक्स और इसके ट्विस्ट काफी उबाऊ हैं।

फिल्म का म्यूजिक

फ‍िल्‍म के गाने काफी मजेदार हैं। गानों पर रानी बच्चों के साथ गाते-झूमते नजर आ रही हैं। जसलीन रॉयल और हितेश सोनिक ने फिल्म को म्यूजिक दिया है, और लोगो को हिचकी के गाने काफी पसंद भी आरहे हैं।
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रानी मुख़र्जी की एक्टिंग

'हिचकी’ में  नैना माथुर का किरदार निभा रहीं रानी ने शानदार परफॉरमेंस दी हैं। चार साल बाद परदे पर उन्हें देखना बेहद सुखद है। ट्यूरेट सिंड्रोम से ग्रसित और बात करते-करते गर्दन झटकने वाले किरदार से रानी दर्शकों को बांधने में कामयाब रहीं। उनकी एक्टिंग आपका दिल जीत लेगी।

फिल्म में रानी मुखर्जी के साथ सपोर्टिंग रोल में हर्ष मायर, सचिन पिलगांवकर, शुप्रिया पिलगांवकर और कुणाल शिंदे जैसे कलाकार भी नजर आए हैं। फिल्म में रानी की बीमारी को एक कमजोरी के तौर पर नहीं दिखाया गया, बल्क‍ि ये दिखाया गया कि इससे किस तरह मेच्योरिटी के साथ निपटा जा सकता है।

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फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स-

फिल्म का क्लाईमैक्स और इसके ट्विस्ट काफी उबाऊ हैं और आप इससे कनेक्ट नहीं कर पाएंगे। फिल्म में नीरज काबी का विलेन प्रिंसिपल वाला किरदार बचकाना लगता है। उनकी गरीब बच्चों से चिढ़ नाजायज़ लगती है और हर समय रानी का उनको हराना भी बेतुका सा लगता है।फिल्म केवल अभिनय पर टिकी है। हर किसी ने अपना काम बखूबी किया है। अगर कमी है तो फिल्म की कहानी, पटकथा और निर्देशन में जो इसे बहुत ज़्यादा एवरेज फिल्म बना देती है।

क्यों देखें फिल्म-

यह फिल्म पूरी तरह से रानी के अभिनय पर टिकी हुई है।यह फिल्म पीकू, टारे ज़मीन पर और पा की तरह कमर्शियल लीग से हटकर बनायीं गयी है, जो कि काबिल-ए-तारीफ है।


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