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BRICS में भारत की जीत:पाक समर्थित आतंकवाद पर चर्चा, 4 समझौतों पर हस्ताक्षर

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 4 , 2017 , 20:26 IST

अर्थव्यवस्था और कारोबार समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए ब्रिक्स के सदस्य देशों ने यहां पांच देशों के सम्मेलन में सोमवार को चार समझौते पर हस्ताक्षर किए। ब्रिक्स के सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। जिन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, उनमें आर्थिक और व्यापार सहयोग पर कार्रवाई एजेंडा, नवोन्मेष सहयोग पर ब्रिक्स की कार्ययोजना, ब्रिक्स सीमा शुल्क सहयोग का सामरिक ढांचा और ब्रिक्स व्यापार परिषद व न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के बीच रणनीतिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) शामिल हैं। एनडीबी ब्रिक्स द्वारा स्थापित एक बहुपक्षीय विकास बैंक है।

पाकिस्तानी आतंकी समूह की चर्चा भारत की जीत

पाकिस्तान से पैदा हो रहे आतंकवाद के खिलाफ भारत की एक बड़ी जीत तब हुई, जब ब्रिक्स देशों ने सोमवार को अपने घोषणा-पत्र में पाकिस्तानी आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) व जैश-ए-मोहम्मद को शामिल किया, और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए एक व्यापक दृष्किोण अपनाने का आह्वान किया। शियामेन में 9वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के 43 पृष्ठों के घोषणा-पत्र में एलईटी व जेईएम के साथ ही टीटीपी (तहरीक -ए-तालिबान पाकिस्तान) को इस्लामिक स्टेट के समतुल्य बताया गया और उनके कार्यो की निंदा की गई। नई दिल्ली एलईटी व जेईएम को भारत में हुए आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराता रहा है।

चीन हमेशा पाकिस्तान का करते रहा है बचाव

बीते साल गोवा में हुए 8वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन ने घोषणा-पत्र में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों को शामिल करने का विरोध किया था। भारत, अमेरिका व दूसरे देशों द्वारा पाकिस्तान में आतंकवादियों को पनाह देने को लेकर निंदा किए जाने के बाद भी चीन अतीत में अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान का बचाव करता रहा है।

शियामेन घोषणा-पत्र में कहा गया है कि,

हम क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर और तालिबान, इस्लामिक स्टेट (आईएस), अलकायदा और इससे संबद्ध संगठनों ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, टीटीपी और हिज्बुल-तहरीर द्वारा की गई हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हैं

इस शिखर सम्मेलन के घोषणा-पत्र में एलईटी व जेईएम को शामिल किया जाना भारत की बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है। यह चीन के रुख में मामूली बदलाव को भी दर्शाता है।

मसूद अजहर के बैन पर चीन हमेशा जताता रहा है विरोध

जेईएम प्रमुख मसूद अजहर को भारतीय सेना के प्रतिष्ठानों पर घातक हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। भारत ने अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र का रुख किया था, लेकिन चीन ने बार-बार इस प्रस्ताव की राह में रोड़ा अटकाया है। एलईटी को 2008 में मुंबई आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, इस हमले में 166 भारतीय व विदेशी मारे गए थे।

 


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