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समलैंगिकता अपराध के दायरे से होगा मुक्त? धारा 377 की समीक्षा के लिए SC तैयार

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 8 , 2018 , 15:41 IST

एक महत्‍वूपूर्ण घटनाक्रम में, सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंध को अपराध की श्रेणी से हटाने की मांग करने वाली याचिका को बड़ी पीठ के पास भेजा है। मुख्‍य न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन सदस्‍यीय बेंच ने कहा कि वह धारा 377 की संवैधानिक वैधता जांचने और उसपर पुर्नविचार करने को तैयार हैं।

समलैंगिक यौन संबंध को अपराध के दायरे में रखा जाए या नहीं

इस कानून के तहत 2013 में समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखा गया था। शीर्ष अदालत ने केंद्र को नोटिस भेजकर एलजीबीटी समुदाय के पांच सदस्‍यों की याचिका पर जवाब तलब किया है।

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याचिका में पांचों ने आरोप लगाया है कि वह अपनी प्राकृतिक यौन पंसद को लेकर पुलिस के डर में रहते हैं।

व्यक्तिगत यौन अधिकारों का होना चाहिए सम्मान

सुप्रीम कोर्ट के इस स्‍टैंड पर LGBT एक्टिविस्‍ट अक्‍काई ने एएनआई से कहा, ”हमें इसका स्‍वागत करने की जरूरत है। हमें अभी भी भारतीय न्‍याय व्‍यवस्‍था से उम्‍मीद है। हम 21वीं सदी में रह रहे हैं। सभी राजनेताओं और राजनैतिक दलों को अपनी चुप्‍पी तोड़कर व्‍यक्तिगत यौन अधिकारों का समर्थन करना चाहिए।”

 


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