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IAF राफेल विमान के स्वागत की तैयारी में जुटी, पायलटों को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया फ्रांस!

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 9 , 2018 , 19:36 IST

राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण सहित विपक्ष भी आरोप लगा चुके है। ऐसे कई आरोपो के बाद भी राफेल डील पर भारत में मचे राजनीतिक घमासान के बीच भारतीय वायुसेना ने विमान के लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना शुरू कर दिया है। पायलटों को ट्रेनिंग के लिए जल्द ही फिर फ्रांस भेजा जाएगा। सरकार ने जेट के हैंगर, शेल्टर और रखरखाव के लिए दो बेसों को 400 करोड़ रुपए मुहैया कराए हैं।
वही प्रशांत भूषण ने अनिल अंबानी के रिलायंस समूह को कमीशन के तौर पर 21,000 करोड़ मिलने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने इस डील से जुड़े कमीशन की तूलना 1980 के दशक के बोफोर्स तोप सौदे में दिए गए कमीशन से की।

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प्रशांत भूषण ने आरोप लगाते हुए कहा, राफेल डील इतना बड़ा घोटाला है कि जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने आगे कहा कि बोफोर्स 64 करोड़ रूपये का घोटाला था जिसमें 4 फीसदी कमीशन दिया गया था। इस घोटाले में कमीशन कम से कम 30 प्रतिशत है। अनिल अंबानी को दिए गए 21,000 करोड़ रुपये महज कमीशन की रकम है, और कुछ नहीं।प्रशांत भूषण ने कहा कि भारतीय वायु सेना को 126 विमानों की जरूरत थी। सेना ने किस तरह अपनी जरूरत कम की और नए सौदे से तकनीक वाली उपधारा गायब होने पर सवाल किए।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना साल के अंत तक पायलटों के एक और जत्थे को फ्रांस भेज सकती है। इसके लिए आईएएफ की एक टीम पहले ही राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन के फ्रांस स्थित दफ्तर जा चुकी है। अधिकारियों ने राफेल में भारतीय स्थिति के हिसाब से जेट में कुछ बदलाव भी कराए हैं। डसॉल्ट ने रॉफेल की टेस्ट फ्लाइट भी शुरू कर दी हैं। भारत ने कंपनी को तय समय में राफेल को डिलीवर करने के लिए कहा है।

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अंबाला एयरफोर्स स्टेशन को मिलेगा राफेल का पहला स्क्वॉड्रन

एक अधिकारी के मुताबिक, राफेल का पहला स्क्वाड्रन अंबाला एयरफोर्स स्टेशन को मिलेगा। आईएएफ अंबाला स्टेशन को कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम मानता है। पाकिस्तान का बॉर्डर यहां से महज 220 किलोमीटर दूर है। सूत्रों का कहना है की फ्रांस लगातार जेट की सप्लाई पर भारत को पूरी जानकारी दे रही है। पायलटों की एक टीम साल की शुरुआत में भी ट्रेनिंग के लिए फ्रांस भेजा गया था। डील के तहत भारत को 36 राफेल फाइटर जेट विमान मिलने हैं। पहला एयरक्राफ्ट सितंबर 2019 तक मिलने की उम्मीद है और बाकी कई चरणों में 2022 तक मिलने की उम्मीद है।

बता दें कि पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर अनिल अंबानी की कंपनी को इस डील के तहत करोड़ों रूपये का लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था। जबकि रिलायंस समूह ने राहुल के आरोपों को खारिज करते हुए बयान जारी किया था, ‘रिलायंस को करोड़ों रूपये का लाभ पहुंचाने के आरोप कल्पना की उपज हैं जिन्हें निहित स्वार्थों द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है।’ कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल राफेल डील को लेकर केंद्र सरकार से जेपीसी जांच की मांग कर रहे हैं। मॉनसून सत्र के दौरान कथित राफेल घोटाले पर संसद में जमकर हंगामा हुआ था।


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