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यदि भगवान छुआछूत को मानता है तो मैं उसे भगवान नहीं कहूंगा : बाल गंगाधर तिलक ( पुण्यतिथि विशेष)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 1 , 2018 , 10:46 IST

1 अगस्त को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि है। देश की आजादी के लिए अपने प्राणों को आहुत करने वाले भारत माता के वीर सपूत बाल गंगाधर तिलक 'पूर्ण स्वराज' की मांग कर अंग्रेजों के मन में खौफ पैदा कर दिया था। अंग्रेजों का विरोध करने पर कई बार उनको जेल भी जाना पड़ा और उनके ऊपर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया।

Tilak__bb1897-98 के दौरान 18 महीने तक वह जेल में रहे। 1908-1914 तक फिर उनको मंडाले की जेल में भेजा गया। यहां तिलक 6 साल तक जेल में रहे और दुनिया से उनका कोई संपर्क नहीं रहा।Tilak_feature_बाल गंगाधर तिलक ने जेल में 'गीता रहस्य' नाम की पुस्तक लिखी थी। भले ही तिलक आजाद भारत में सांस लिए बगैर इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनकी कही बातें आज भी सामाजिक एकता कायम करने में कारगर हो सकती है। 1 अगस्त, 1920 को भारत माता के इस सपूत का निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार का आयोजन चौपाटी, मुंबई में हुआ था। भारत के इतिहास में तिलक के अंतिम संस्कार का जुलूस सबसे बड़ा था जिसमें 2 लाख से ज्यादा लोगों ने भाग लिया था।

देखिए तिलक को 5 विचार

1. स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, हम इसे लेकर रहेंगे।

2. यदि भगवान छुआछूत को मानता है तो मैं उसे भगवान नहीं कहूंगा।

3. ये सच है कि बारिश की कमी के कारण अकाल पड़ता है लेकिन ये भी सच है कि भारत के लोगों में इस बुराई से लड़ने की शक्ति नहीं है।

4. धर्म और व्यावहारिक जीवन अलग नहीं हैं। संन्‍यास लेना जीवन का परित्याग करना नहीं है। असली भावना सिर्फ अपने लिए काम करने की बजाए देश को अपना परिवार बना मिलजुल कर काम करना है।

5. प्रगति स्वतंत्रता में निहित है। बिना स्वशासन के न औद्योगिक विकास संभव है, न ही राष्ट्र के लिए शैक्षिक योजनाओं की कोई उपयोगिता है। देश की स्वतंत्रता के लिए प्रयत्न करना सामाजिक सुधारों से अधिक महत्वपूर्ण है।


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