लाइफस्टाइल

अगर दिन में सुस्ती और नींद आती है तो, हो सकते है 'अलजाइमर डिज़ीज़' का शिकार

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| सितंबर 8 , 2018 , 20:30 IST

अमेरिका स्थित जॉन हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक स्टडी की और दावा किया कि जो लोग दिन के समय सुस्ती और नींद महसूस करते हैं, उनमें उन लोगों के मुकाबले भूलने की बीमारी होने का तीन गुना ज़्यादा खतरा होता है जो रात को अच्छी नींद लेते हैं। इस स्टडी में से पता चला है कि अगर आपको दिन में सुस्ती और नींद आती है तो आप ऐल्टशाइमर्ज़ डिज़ीज़ (भूलने की बीमारी) का शिकार हो सकते हैं।

एक लंबे समय तक किए गए इस स्टडी के लिए कुछ प्रौढ़ लोगों का निरीक्षण किया गया और सामने आया कि जिन लोगों को दिन के वक्त स्लीपी महसूस हो रहा था, उनमें अलजाइमर डिज़ीज़ होने का खतरा तीन गुना ज़्यादा था। ऐसे लोगों के दिमाग में बीटा अमायलॉइड (beta amyloid) नाम का एक प्रोटीन पाया गया। यह प्रोटीन अलजाइमर डिज़ीज़ की पहचान है।

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सेफ्टी ऐंड सिक्यॉरिटी फॉर जेनरेशन्स (SAGA) द्वारा भी किए गए एक सर्वे में पता चला कि भूलने की यह बीमारी हार्टअटैक और कैंसर से भी ज्यादा तेजी से फैल रही है। 2010 से 2013 के बीच ऐसे लोगों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। यूएस की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रफेसर बेरी गॉर्डन का कहना है कि यह बीमारी बड़ी तेजी से लोगों में फैल रही है। इसकी एक वजह वर्कप्लेस पर काम का प्रेशर और जल्दी सफलता पाने का जुनून भी हो सकता है।

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स्लीप (SLEEP) जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी ने उन रिपोर्ट्स को पुख्ता कर दिया है, जिनमें अक्सर कहा जाता रहा है कि कम नींद लेने या फिर सही ढंग से नहीं सोने की वजह से अलजाइमर जैसी परेशानी हो सकती है। इस स्टडी से साफ ज़ाहिर हो गया है कि अगर ऐल्टशाइमर्ज़ डिज़ीज़ से बचना है तो पूरी और अच्छी नींद लेना आवश्यक है।

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जॉन हॉप्किन्स के ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में असोसिएट प्रफेसर एडम पी. स्पाइरा ने कहा, 'डाइट, एक्सर्साइज़ और ज्ञान संबंधी गतिविधियां अलजाइमर से बचाव करने में सहायक होती हैं। अगर डिस्टर्ब्ड नींद से ऐल्टशाइमर्ज़ डिज़ीज़ होने का ज़्यादा खतरा रहता है तो फिर हम ऐसे मरीज़ों को इलाज कर सकते हैं, जिन्हें कम नींद आती है या फिर उनींदे महसूस करते हैं।'

कैसे लोग हैं ज्यादा पीड़ित

मध्यम उम्र के व्यक्ति इस समस्या से ज्यादा ग्रस्त नजर आते हैं। जिन लोगों पर जरूरत से ज्यादा वर्कलोड है और जो खुद के लिए जरा सा भी वक्त नहीं निकालते उनमें यह बीमारी ज्यादा पाई जाती है।

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स्पाइरा के मुताबिक, अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि आखिर दिन के वक्त उनींदा महसूस करने को बीटा अमायलॉइड प्रोटीन के जमा होने से जोड़कर क्यों देखा जा सकता है। एक संभावित कारण यह भी हो सकता है कि दिन में स्लीपी फील करने की वजह से ही यह प्रोटीन ब्रेन में बन जाता हो।

क्या करें

जब दूसरे लोग आपसे जरूरत से ज्यादा उम्मीद करने लगते हैं तो आप खुद को भूलने लगते हैं। डॉक्टर बेरी का कहना है कि शुरुआती दौर में इस स्थिति से छुटकारा पाने के लिए जरूरी है कि आप जरूरत से ज्यादा उम्मीद न पालें। जब हम कुछ भूल जाते हैं तो खुद को इसके लिए दोषी ठहराने लगते हैं। लेकिन जब हम कुछ याद रखते हैं तो उसके लिए खुद को क्रेडिट नहीं देते।

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जरूरत से ज्यादा सूचनाओं को जानने की कोशिश में जरूरी नहीं कि आपको हर चीज पता हो इसलिए खुद को जागरूक रखें पर उसके लिए अपने दिमाग पर ज्यादा बोझ न डालें। कोई भी इंसान पूरी तरह से परफेक्ट नहीं हो सकता। अगर कुछ भूलने लगें तो परेशान होने की बजाए अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करें।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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