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अगर आपको बहुत गुस्सा आता है, तो इन उपायों से कर सकते है कंट्रोल

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 26 , 2018 , 17:25 IST

गुस्सा प्रत्येक व्यक्ति को आता है। जब कोई आपकी बात नहीं मानता तो गुस्सा आता है। जब कोई काम आपकी मर्जी के मुताबिक नहीं होता है तो गुस्सा आता है। ऐसे कई कारण हैं जिसकी वजह से गुस्सा आता हैं।
आखिर गुस्सा क्यों आता है...

एक शोध में मस्तिष्क में गुस्‍से की जड़ का पता चलता है। शोध्‍कर्ताओं को गुस्‍से के लिए जिम्‍मेदार ब्रेन रिसेप्‍टर का पता चला है । यह मस्तिष्क रिसेप्टर एक एंजाइम है जिसका नाम मोनोएमीन आक्सीडेस ए है। इतना ही नहीं इस रिसेप्टर को बंद कर देने से गुस्से से निजात भी पाई जा सकती है। इस एंजाइम के उचित तरीके से कार्य नहीं करने से चूहों में तुरंत गुस्सा आते देखा गया है। ये रिसेप्टर मानव में भी पाए जाते हैं।
इस रिसेप्टर को बंद कर वैज्ञानिकों को चूहों को गुस्से से मुक्त करने में सफलता मिली है। इसके बाद इंसानों के भी गुस्‍से से निजात पाने का एक नया रास्ता सामने आया है।

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विज्ञान पत्रिका न्यूरोसांइस जर्नल के मुताबिक साउथ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और इटली के शोधार्थियों की यह खोज उन्मादी व्यवहार तथा अल्जाइमर रोग, ऑटिज्म, बाइपोलर डिसऑर्डर और सिजोफ्रेनिया जैसे कई अन्य मनोवैज्ञानिक रोगों के इलाज के लिए औषधि का विकास करने में मदद कर सकती है।

गुस्सा कई तरह के होते है

गुस्से को मोटे तौर पर दो हिस्सों में बांट सकते हैं : पैसिव एंगर और अग्रेसिव एंगर।

पैसिव एंगर : पैसिव एंगर के ग्रस्ति लोगों में अक्सर इस तरह की लक्षण दिखाई देती है। वे दूसरों की पीठ पीछे बुराई करना, आई कॉन्टैक्ट से बचना, दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करना, खुद साइडलाइन होकर दूसरों को किसी के खिलाफ उकसाना, झूठे आंसू बहाना, अपने नेगेटिव विचार किसी शख्स के जरिये अपने दुश्मन तक पहुंचाना, खुद को हरदम दोषी मानना, बिना बात के बार-बार माफी मांगना, अविश्सनीय लोगों पर निर्भर होना, छोटी-छोटी बातों पर नाराज होना और महत्वपूर्ण चीजों को नजरंदाज कर देना, सेक्सुअली कमजोर होना, तमाम तरह के ऑब्सेसिव डिस्ऑर्डर। मसलन सफाई को लेकर कुछ ज्यादा चिंतित रहना, सभी से परफेक्शन की उम्मीद रखना, बार-बार चीजों को चेक करना और छोटी-छोटी बातों पर वहम करना इन सब बातों से वो ग्रसित होते हैं। वहीं,

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अग्रेसिव एंगर

जिसे अग्रेसिव एंगर आता हो उसके पास इस प्रकार के लक्षण होगें वो अक्सर दूसरों को धमकाना, छींटाकशी करना, मुक्का दिखाना, ऐसे कपड़ों और सिंबल का यूज करना जिनसे गुस्से का इजहार होता है, तेज आवाज में कार का हॉर्न बजाना, दूसरों पर फिजिकल अटैक करना, गालियां देना, अश्लील जोक सुनाना, दूसरों की भावनाओं की परवाह न करना, बिना किसी गलती के दूसरों को सजा देना, सामान तोड़ना, जानवरों को नुकसान पहुंचाना, दो लोगों के बीच के रिश्ते खराब कर देना, गलत तरीके से ड्राइव करना, चीखना-चिल्लाना, दूसरों की कमजोरी के साथ खेलना, अपनी गलती का दोषारोपण दूसरों पर करना, जल्दी-जल्दी बोलना, जल्दी-जल्दी चलना, ज्यादा काम करना और दूसरों से ऐसी उम्मीद रखना कि वे भी ऐसा ही करें, दिखावा करना, हर वक्त लोगों की अटेंशन चाहना, दूसरों की जरूरतों को नजरंदाज कर देना, लाइन जंप करना, भूतकाल की बुरी यादों को हर वक्त याद करते रहना, दूसरों को माफ न कर पाना इन सब आदतें उनमें दिखाई देती हैं।

गुस्से की पहचान

- शरीर में बेचैन करने वाली सनसनाहट पैदा होती है।
- गुस्से में होने पर शरीर की मसल्स तन जाती हैं, जबड़े भिंच जाते हैं, चेहरा लाल हो जाता है और नजरें सामने वाले को घूरने लगती हैं। - ज्यादा बढ़ जाए तो सब कुछ तोड़ने-फोड़ने का मन करता है।

कैसे करें इसे कंट्रोल

अगर आपको गुस्सा को कंट्रोल करना है तो सबसे पहले आपको अपने खान पान पर ध्यान देना होगा। हालांकि मोती पहनकर, चांदी का कड़ा हाथ में पहन कर, स्फटिक की माला, और अपने भोजन में दही को नियमित रूप से शामिल करें। शकर डालकर दही खाना या समय-समय पर मावे की मिठाई खाने से चंद्र से संबंधित दोषों में कमी आती है। इससे मानसिक स्थिति मजबूत होती है और बेवजह के क्रोध पर लगाम लगती है।


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