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90,000 करोड़ का कर्जदार IL&FS डूबने की कगार पर, डूब सकती है आपकी गाढ़ी कमाई!

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 28 , 2018 , 17:59 IST

इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से जुड़ी सरकारी क्षेत्र की कंपनी आईएल एंड एफएस अपने क़र्ज़ों की किस्त नहीं चुका पा रही है। आईएल एंड एफएस पर कुल 90 हजार करोड़ का कर्ज है। इसके चलते न केवल कई बड़े बैंक संकट में पड़ गए हैं बल्कि प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड में पैसा लगाने वाले आम लोगों की मेहनत की कमाई भी दांव पर लगी है।

दरअसल, देश की बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंसिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंसिंग ऐंड लीजिंग सर्विसेज लि. (IL&FS) ने पूरे नॉन-बैंकिंग सेक्टर में भूचाल ला दिया जब यह पिछले कुछ हफ्तों में कर्ज अदायगी में असफल रहा। अब इंडस्ट्री के अधिकारियों एवं एक्सपर्ट्स का कहना है कि रेग्युलेटर्स 1,500 छोटी-छोटी नॉन-बैंकिंग फाइनैंशल कंपनियों के लाइसेंस कैंसल कर सकते हैं क्योंकि इनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं है। इसके साथ ही, अब नॉन-बैकिंग फाइनैंशल कंपनियों के नए आवेदन की मंजूरी में भी मुश्किलें आएंगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) नॉन-बैंकिंग फाइनैंशल कंपनियों के लिए नियम कड़े कर रहा है। उसने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

निवेशक हो जाएं सावधान

यह नॉन बैंकिंग फाइनेंस (एनबीएफसी) कंपनियां हैं देश के छोटे शहरों, कस्बों और गांव में खुली हुई हैं। देश की सबसे बड़ी वित्तीय कर्ज देने वाली कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग एंड लीजिंग सर्विस लिमिटेड (आईएल एंड एफएस) इस वक्त खुद ही सबसे बड़ी डिफॉल्टर बन गई है।

इस कंपनी पर 90 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इस कंपनी में भारतीय जीवन बीमा जैसी बड़ी कंपनी ने भी निवेश कर रखा है। अब अगर यह कंपनी डूबी तो फिर इनमें से 11400 एनबीएफसी कंपनियों के लाइसेंस भी रद्द हो सकते हैं। इन कंपनियों के पास इतना पैसा भी नहीं बचा है कि वो कंपनियों को आगे चला सकें।

डूबेंगे 22.1 लाख करोड़ रुपये

इन 1500 कंपनियों ने बाजार में 22.1 लाख करोड़ का कर्ज दे रखा है। अब कर्ज न चुकाने की स्थिति और आईएलएंडएफएस के डिफॉल्टर होने से इन कंपनियों की हालत भी खराब हो गई है। इन एनबीएफसी कंपनियों से वो लोग लोन लेते हैं, जिन्हें किसी वजह से बैंक से लोन नहीं मिलता है।

आरबीआई कड़े करेगा नियम

आरबीआई भी ऐसी कंपनियों पर सख्ती करने जा रहा है। इन कंपनियों पर बैंकों जैसे नियम नहीं लागू होते थे। बैंकों के मुकाबले एनबीएफसी कंपनियों से लोन लेना काफी आसान था। आईएलएंडएफएस भी एक एनबीएफसी कंपनी है, जो कि बड़े प्रोजेक्ट को लोन देती थी। इस कंपनी की क्रेडिट रेटिंग भी काफी अच्छी थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों में इस कंपनी की साख भी काफी गिर गई है। एक हफ्ते के भीतर इसकी रेटिंग को ‘एए प्लस’ से घटाकर कूड़ा करकट कर दिया गया है।


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