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राजनयिक विवाद: बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने पर राजी हुए भारत और पाकिस्तान

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 31 , 2018 , 08:15 IST

भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे राजनयिकों से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए दोनो देश राजी हो गए है। दोनों देशों ने बीते दिनों में अपने राजनायिकों को सताने का आरोप प्रत्यारोप एक दूसरे पर कर चुके हैं। दोनों देश अब यह मान रहे हैं कि इस मसले को ज्यादा खींचना ठीक नहीं होगा।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत और पाकिस्तान में राजनयिक/ दूत कर्मी से बर्ताव की आचार संहिता, 1992 की तर्ज पर दोनों देश राजनयिकों और राजनयिक परिसरों से बर्ताव से जुड़े विषयों को सुलझाने के लिए पारस्परिक तौर पर सहमत हुए हैं। पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने भी इसी तरह का एक बयान जारी किया है।

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भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यहां बताया कि दोनों देशों के राजनयिकों से बर्ताव पर 1992 की एक आचार संहिता के तहत यह मुद्दा सुलझाने का काम किया जाएगा। इससे पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने भारत में पाकिस्तानी राजनयिकों से बुरे बर्ताव की शिकायत की थी और चार-पांच घटनाओं का जिक्र करते हुए इस्लामाबाद में भारत के उप उच्चायुक्त को बुलाया था।

भारत स्थित पाकिस्तान के उच्चायुक्त सोहैल महमूद को इस मसले पर चर्चा के लिए इस्लामाबाद बुलाया गया था। इसके बाद पाकिस्तानी मीडिया ने यह कहना शुरू कर दिया कि दोनों देशों के संबंध इतने खराब हो गए हैं कि पाकिस्तान ने अपने उच्चायुक्त को वापस बुला लिया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में 22 मार्च को भारतीय उच्चायोग ने वरिष्ठ अधिकारियों को सताए जाने की तीन घटनाओं का विशेष रूप से जिक्र किया था। वहीं, पाकिस्तान ने दावा किया था कि सात मार्च से उसके राजनयिकों को सताए जाने और धमकाए जाने की करीब26 घटनाएं हुई हैं।

इसके बाद पाकिस्तान ने अपने उच्चायुक्त सोहैल महमूद को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए स्वदेश बुलाया था। हालांकि, वह 22 मार्च को नई दिल्ली लौट गए।

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इस बीच, शुक्रवार की घोषणा के बाद पाकिस्तान विदेश कार्यालय प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि राजनयिकों से बर्ताव से जुड़े 1992 के तंत्र के तहत इस विषय का हल किया जाएगा। बहरहाल, फिलहाल यह मालूम नहीं है कि राजनयिकों को लेकर मौजूदा तनाव को दूर करने के लिए कहां और कैसे सहमति बनी।


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