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ऐसे कैसे बनेगा Digital India? 4G स्पीड में सबसे आखिरी पायदान पर भारत

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 22 , 2018 , 18:59 IST

भारत में 4जी इंटरनेट सेवा की स्‍पीड दुनिया में सबसे कम है. मोबाइल एनालिटिक्‍स फर्म ने अपनी अध्‍ययन की रिपोर्ट में यह दावा किया है. रिपोर्ट के अनुसार 4जी इंटरनेट सेवा की स्‍पीड के मामले में भारत दुनिया के 88 देशों में सबसे निचले पायदान पर है.  रिपोर्ट का दावा है कि भारत के विपरीत पाकिस्‍तान की 4जी इंटरनेट की स्‍पीड दोगुनी है. यही नहीं पाकिस्‍तान के अलावा, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ट्यूनीशिया की इंटरनेट सेवा भी भारत से बेहतर है.

यह अध्‍ययन मोबाइल एनालिटिक्‍स फर्म OpenSignal ने किया 6 महाद्व‍ीपों के 88 देशों में किया है. OpenSignal ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत जैसे देश में जहां इंटरनेट का इस्‍तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, वहां इंटरनेट की स्‍पीड अब भी चुनौती बनी हुई है. जहां एक ओर लोग 2जी सेवा को छोड़ 4जी को अपना रहे हैं, वहीं लोग 4जी इंटरनेट सेवा की स्‍पीड से भी संतुष्‍ट नहीं हैं. OpenSignal ने रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत के मुकाबले पाकिस्‍तान दोगुनी 4जी स्‍पीड का लाभ उठा रहा है. भारत में जहां 6 mbps इंटरनेट स्‍पीड मिल रही है, वहीं पाक में इंटरनेट सेवा की स्‍पीड 14 mbps है. 9 mbps स्‍पीड के साथ Algeria सबसे खराब इंटरनेट स्‍पीड देने वाले देशों में दूसरे स्‍थान पर है.

भारत में 4जी इंटरनेट सेवा 88 देशों में सबसे कमजोर

पाकिस्तान, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ट्यूनीशिया की इंटरनेट सेवा भारत से बेहतर

मोबाइल एनालिटिक्‍स फर्म OpenSignal ने किया 88 देशों में इंटरनेट सेवा की स्‍पीड का अध्‍ययन

सिंगापुर में सबसे अच्‍छी इंटरनेट स्‍पीड


अध्‍ययन की रिपोर्ट का दावा है कि सिंगापुर के इंटरनेट सब्‍सक्राइबर्स को सबसे तेज स्‍पीड मिलती है. यहां लोग 44 mbps इंटरनेट स्‍पीड का लाभ उठाते हैं. नीदरलैंड इस सूची में 42 mbps स्‍पीड के साथ दूसरे स्‍थान पर है. वहीं नॉर्वे 41 mbps स्‍पीड के साथ तीसरे स्‍थान पर. दक्ष‍िण कोरिया इस सूची में चौथे पायदान पर है. दक्ष‍िण कोरिया मे इंटरनेट की स्‍पीड 40 mbps है. यह रिपोर्ट 6 महाद्वीपों के 88 देशों में रहने वाले 38 लाख स्‍मार्टफोन धारकों के अध्‍ययन पर आधारित है. भारत में इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां मुश्‍क‍िल समय से गुजर रही हैं, जिसमें उन्‍हें भारी नुकसान का सामना भी करना पड़ रहा है. कई इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां इस सेक्‍टर से बाहर निकल चुकी हैं.


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