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कुलभूषण मामले पर एक वेबसाइट की वजह से देश की हुई किरकिरी, जाधव को बताया था रॉ एजेंट!

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 6 , 2018 , 20:37 IST

मीडिया कभी-कभी अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का नाजायज फायदा भी उठाती है। अंग्रेजी की एक वेबसाइट ने कुलभूषण जाधव पर एक ऐसी स्टोरी कयासों के हवाले प्रकाशित कर दी कि घंटे भर के अंदर उस वेबसाइट को ब्लॉक करने के लिए भारत में ट्विटर पर हैशटैग #BlockQuint टॉप ट्रेंड करने लगा। दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने इसे समर्थन देते हुए ट्विट किया है। 

पाकिस्तान में इस भारतीय वेबसाइट के स्टोरी की वाहवाही होने लगी और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और सरकारी ट्विटर हैंडल ने कुलभूषण जाधव मामले पर अपने कूटनीतिक जीत की वाहवाही बटोरने में थोड़ी भी देर नहीं की। हालांकि वेबसाइट ने किरकिरी और विरोध के बाद यह स्टोरी वेबसाइट से हटा ली है।

दरअसल अंग्रेजी की एक वेबसाइट 'द क्विंट' ने इंडियन नेवी के ऑफिसर कुलभूषण जाधव को रॉ का जासूस करार दिया था और लिखा है कि रिसर्च एंड एनालाइसिंस विंग (रॉ) ने बतौर जासूस उसे पाकिस्तान में ऑपरेशन हेड करने के लिए नियुक्त किया था। हालांकि साथ ही इस स्टोरी में यह भी कहा गया है कि रॉ के दो सीनियर ऑफिसर जाधव को जासूस नियुक्त करने के पक्ष में नहीं थे। रॉ के ये दोनों ऑफिसर सेक्रेटरी लेवल के थे और उन्हें कुलभूषण जाधव की काबलियत पर आशंका थी। बाद में इंटेलीजेंस एजेंसी के चीफ के हस्तक्षेप के बाद जाधव को बतौर जासूस पाकिस्तान में रॉ का एजेंट बनाया गया।

पाकिस्तान के डिफेंस वेबसाइट defence.pk ने इस भारतीय वेबसाइट की स्टोरी को हू-ब-हू प्रकाशित की है।

देखिए लिंक- Two Ex-RAW Chiefs Did Not Want Kulbhushan Jadhav Recruited As Spy

इतना ही नहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपने ट्विटर हैंडल से यह ट्वीट किया है कि भारत के जिस पत्रकार ने यह स्टोरी प्रकाशित की है वो गायब बताए जा रहे हैं। भारत में प्रेस की आजादी खतरे में है।

 

भारत के स्टैंड को भारतीय वेबसाइट ने ही नेस्तनाबुत कर डाला

कुलभूषण जाधव मामले पर इस भारतीय अंग्रेजी वेबसाइट की इस स्टोरी ने भारत के स्टैंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीचे गिराने का काम किया है। कुलभूषण जाधव पाकिस्तान में बतौर रॉ के एक जासूस के रुप में काम कर रहा था यह कंफर्म कर इस वेबसाइट ने भारत की राजनयिक और कूटनीतिक नीतियों को नीचा दिखाने का प्रयास किया गया है। इस स्टोरी के बाद पाकिस्तान का सीना और चौड़ा हो गया है और अंतराष्ट्रीय पटल पर उसे यह कहने का मौका मिल गया है कि भारतीय मीडिया ही जाधव को जासूस करार दे रही है।

ये पूरी कहानी रिपोर्टर ने अपने सूत्रों के जरिए लिखी है, कोई सुबूत नहीं है और ना ही किसी का ऑफिशियल बयान है। एकबारगी मान भी लिया जाए कि ये सही है तो क्या कोई भी पत्रकार इतने संजीदा और सीक्रेट इश्यू पर भारत सरकार के खिलाफ स्टैंड ले सकता है? वो भी तब जब उसके पास सुबूत नहीं है और पाकिस्तान इस लेख को इंटरनेशनल कोर्ट ही नहीं कई इंटरनेशनल मंचों पर इस्तेमाल करके भारत की फजीहत कर सकता है।
साफ है अति उत्साह या खोजी पत्रकारिता के जुनून में लिखी गई इस स्टोरी में देश हित को ताक पर रख दिया गया है। पाकिस्तान के पास कुलभूषण जाधव के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं थे, लेकिन अब ये लेख उस दिशा में उसकी मदद कर सकता है, ऐसे में कुलभूषण जाधव की रिहाई और जिंदगी बचने की सारी उम्मीदें भी खत्म हो सकती हैं। कल को इस रिपोर्टर और क्विंट प्रबंधन पर भी सवाल उठ सकते हैं तमाम सवाल हैं, क्विंट प्रबंधन ने वो लेख अभी हटा लिया है।


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