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चीन को घेरने के लिए भारत की तैयारी, सीमा पर बनेंगे ये 4 रेल प्रोजेक्ट

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 10 , 2017 , 14:56 IST

डोकलाम विवाद के बाद भारत ने जहां एक तरफ चीन सीमा से लगे इलाकों में रोड प्रॉजेक्ट्स को गति दी है, वहीं अब रेल का जाल बिछाने के लिए भी सर्वे तेज कर दिया गया है। चीन तेजी से सीमा के नजदीक सड़कों और रेल का जाल बिछा रहा है जिससे उसे फिलहाल भारत पर रणनीतिक बढ़त हासिल है। अब भारत भी उसे काउंटर करने के लिए सीमा पर इन्फ्रस्ट्रक्चर डिवेलप करने पर फोकस कर रहा है।

चीन सीमा पर 4 स्ट्रैटिजिक रेलवे लाइन्स की तैयारी

चीन सीमा से सटे इलाकों में रणनीतिक लिहाज से 4 महत्वपूर्ण रेलवे लाइन्स की योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी चल रही है। इन चारों लाइनों पर सर्वे के लिए सरकार ने 345 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जिनमें से रक्षा मंत्रालय की तरफ से 87 करोड़ रुपये 2016-17 के लिए जारी किए जा चुके हैं। रेल राज्य मंत्री राजेन गोहन ने पिछले साल संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी थी। जिन चार स्ट्रैटिजिक रेलवे लाइन्स की तैयारी चल रही है उनमें से एक वेस्टर्न फ्रंट पर बल्कि 3 ईस्टर्न फ्रंट पर हैं।

China

इन 4 रलवे लाइन्स को मंजूरी

वेस्टर्न फ्रंट

बिलासपुर-मनाली-लेह लाइन। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से मनाली होते हुए लेह तक 498 किलोमीटर तक रेलवे लाइन बिछाने के लिए सर्वे चल रहा है। यह दूरी सड़क मार्ग से है लेकिन फाइनल रेलवे लाइन को मंजूरी मिलने के बाद यह दूरी घट-बढ़ सकती है।

ईस्टर्न फ्रंट

मिसामारी (असम)-टेंगा (अरुणाचल प्रदेश)-तवांग (अरुणाचल) तक 378 किलोमीटर लंबा ट्रैक। पासीघाट (अरुणाचल)-तेजु (अरुणाचल) 227 किलोमीटर तक ट्रैक और नॉर्थ लखीमपुर (असम) से सिलापत्थर (असम) तक 249 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन।

Rail projects

बिलासपुर-मनाली-लेह ट्रैक सबसे चुनौतीपूर्ण

भारतीय रेलवे के लिए इस 498 किलोमीटर ट्रैक को बिछाना सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। लेह रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। जम्मू-कश्मीर के इस जिले के पश्चिम में जहां POK है वहीं उत्तर और पूरब में चीन से घिरा हुआ है। प्रस्तावित रेलवे लाइन कुछ अति ऊंचे दर्रो को क्रॉस करेगी जिनमें 17,480 फीट ऊंचा तगलांग ला भी शामिल है।

चीन को हासिल है अहम रणनीतिक बढ़त

सीमा पर रेल नेटवर्क के मामले में चीन को अहम रणनीतिक बढ़त हासिल है। चीन ने भारत सीमा के नजदीक 2 बड़े रेलवे लाइन को चालू कर दिया है जबकि 2 पर अभी काम कर रहा है। गोलमुड से ल्हासा तक 1,142 किलोमीटर लंबी लाइन जुलाई 2006 में ही शुरू हो गई। इसी तरह ल्हासा से शिगात्से तक 253 किलोमीटर लंबी लाइन भी अगस्त 2014 से ही ऑपरेशनल है। ल्हासा से निगत्री तक 433 किलोमीटर और शिगात्से से ड्रोमो तक रेलवे लाइन पर काम चल रहा है।

 

 


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