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26 जनवरी को पहली बार दुनिया देखेगी इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम 'अश्विन' की झलक

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 24 , 2018 , 21:19 IST

26 जनवरी 2018 को भारत गणतंत्र दिवस परेड समारोह में स्वदेशी अडवांस्ड एयर डिफेंस (एएडी) इंटरसेप्टर सिस्टम 'अश्विन' को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगा। इस एयर डिफेंस (एएडी) इंटरसेप्टर सिस्टम की कमान स्कॉड्रन लीडर दक्षेश युवराज सिंह के हाथो में होगी। 

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क्या है अश्विन? 

अश्विन स्वदेशी अडवांस्ड एयर डिफेंस (एएडी) इंटरसेप्टर सिस्टम है जिसके ज़रिए 225 किमी तक की रेंज में दुश्मन की मिसाइलों और हवाई जहाज़ को इंटरसेप्ट कर तबाह किया जा सकता है। 

अश्विन 40,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ रहे टार्गेट को इंटरसेप्ट कर सकता है। 

भारत ने 2017 में अडवांस्ड एयर डिफेंस (एएडी) इंटरसेप्टर सिस्टम 'अश्विन' का कामयाब टेस्ट किया था। इससे काफी कम ऊंचाई से आ रही दुश्मन की मिसाइल को भी तबाह किया जा सकता है। 

यह सिस्टम भारत के बलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) कार्यक्रम का हिस्सा है। बीएमडी कार्यक्रम 90 के दशक के अंत में शुरू हुआ था। इसमें दो स्तरों, एंडो (वायुमंडल के अंदर) और एक्सो (वायुमंडल के बाहर) पर मिसाइलों से रक्षा सुनिश्चित की जाती है। 

एक्सो के तहत 50 से 150 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर मिसाइल को निशाना बनाया जा सकेगा, जबकि एंडो के तहत 20 से 40 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऐसा किया जा सकेगा। 

एक प्लान इससे भी नीचे की मिसाइलों को निशाना बनाने का है, ताकि करीब-करीब 100 फीसदी सुरक्षा हासिल की जा सके। इस प्रोग्राम के फेज 1 के तहत 2000 किलोमीटर की रेंज रखी गई है, जिसे दूसरे फेज में 5000 किलोमीटर किया जाएगा। 

इस प्रोग्राम के तहत 11 फरवरी 2017 को भी पृथ्वी डिफेंस वीइकल का टेस्ट किया गया था। इसमें एक्सो लेवल पर मिसाइल का टेस्ट किया गया था। तब 97 किलोमीटर की ऊंचाई पर टार्गेट मिसाइल को निशाना बनाया गया था। 

उड़ीसा के अब्दुल कलाम आइलैंड से एएडी इंटरसेप्टर मिसाइल की टेस्ट फायरिंग की गई थी, जिसने 15 किमी की ऊंचाई पर टार्गेट को बंगाल की खाड़ी में सफलतापूर्वक निशाना बनाया। 

बीएमडी सिस्टम के तहत देश के अहम रक्षा ठिकानों और शहरों पर अर्ली वॉर्निंग एंड ट्रैकिंग सेंसर्स का जाल बिछाया जाएगा। इसके अलावा जमीन और समुद्र से छोड़े जा सकने लायक इंटरसेप्टर मिसाइल लगाए जाएंगे। 

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इस सिस्टम का अब तक 10 बार परीक्षण किया जा चुका है, जिसमें तीन बार असफलता भी हाथ लगी। रक्षा जानकार मानते हैं कि इन सिस्टम्स की तैनाती में अभी भी कम से कम दो साल का वक्त लगेगा। 

वीडियो में देखें अश्विन की ताकत


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