ख़ास रिपोर्ट

इंदिरा गांधी: फ़ौलादी इरादों वाली भारत की सबसे ताक़तवर प्रधानमंत्री (पुण्यतिथि विशेष)

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| अक्टूबर 30 , 2017 , 23:25 IST

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को कौन नही जानता ? कुछ लोग इंदिरा को उनके कठोर फैसलों के लिए जानते हैं तो वहीं कई लोग इमरजेंसी लागू करने के लिए 42 साल बाद तक उनकी आलोचना करते है। आपको बता दें कि 33 साल पहले 31 अक्टूबर को इंदिरा गांधी के अंगरक्षकों ने 31 गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पुत्री इंदिरा गांधी को बचपन में 'गूंगी गुड़िया' कहा जाता था। 11 साल ही उम्र में इंदिरा गांधी ने बच्चों को साथ लेकर वानर सेना बनाई और अंग्रेजों के खिलाफ सेनानियों की मदद की। सन 1938 में इंदिरा औपचारिक तौर पर इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हुई और 1047 से 1964 पिता जवाहरलाल नेहरू के साथ काम करती रही। ऐसा भी कहा जाता है कि उस समय इंदिरा पीएम नेहरू के साथ बतौर निजी सचिव काम करतीं थी। हालांकि इस बात के कोई औपचारिक सबूत नही है।

इंदिरा गांधी को उनके साहसिक और कठोर फैसलों के लिए जाना जाता था। नोटबंदी और डोकलाम को लोग मोदी सरकार का साहसिक और कठोर फैसला बताते है। ऐसे लोगों को इंदिरा गांधी के कुछ फैसलों पर नजर डालनी चाहिए जिन्हें लेना हर किसी के बस की बात नही थी।

 

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(सौजन्य: टाइम्स ऑफ इंडिया)

बैंकों का राष्ट्रीयकरण

भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए इंदिरा गांधी ने सन 1969 में भारतीय बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। इंदिरा गांधी ने इस दौरान इंदिरा ने 14 कमर्शियल बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था। इंदिरा गांधी के इस फैसले को भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे बड़े सुधर के तौर पर देखा जाता है।

1971 बांग्लादेश युद्ध

1971 में बांग्लादेश ( उस समय का पूर्वी पाकिस्तान ) के अंदर गृहयुद्ध चल रहा था और बांग्लादेश के लोग आजादी की मांग कर रहे थे। उस समय इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान को समर्थन देने का फैसला किया। इंदिरा गांधी के इस फैसले की देश ही नही विदेशों में भी खूब आलोचना हुई लेकिन इंदिरा गांधी पीछे नही हटीं और कुछ ही दिनों के भीतर पाकिस्तान को झुकना पड़ा और बांग्लादेश को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिला।

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पोखरण परमाणु परीक्षण

18 मई 1974 को पोखरण में परमाणु परीक्षण कर इंदिरा गांधी ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। भारत से पहले इस तरह का परीक्षण सिर्फ संयुक्त राष्ट्र के 5 स्थायी सदस्यों ने किया था। इस परीक्षण के बाद भारत दुनिया के ताकतवर देशों में गिना जाने लगा। कहा जाता है कि इंदिरा गांधी ने अपने रक्षा मंत्री को भी इस परीक्षण के बारे में पता लगने नही दिया था।

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आपातकाल

25 जून 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू कर सबको चौक दिया था। इंदिरा गांधी के इस फैसले की आज तक आलोचना की जाती है। भारी आलोचना के बाद भी इंदिरा गांधी ने इस फैसले को गलत नही माना और कहा कि विपक्ष ने ऐसा माहौल बनाया की आपातकाल लगाना जरूरी हो गया था। अब यह फैसला सही हो या गलत पर ऐसे फैसले लेने लिए काफी साहस की जरूरत होती है 

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ऑपरेशन ब्लू स्टार

1980 के दशक में देश के अंदर अलगावादी ताकतें शशक्त हो रही थी। पंजाब के भिंडरावाले के नेतृत्व में अलगावादी खालिस्तान की मांग तेज हो गयी थी। अलगावादियों ताकतों को उस समय पाकिस्तान का भरपूर समर्थन मिल रहा था। तब इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर को घेर लिया। शहर में कर्फ्यू लग गया। जिसके बाद सेना ने मंदिर में मौजूद चरमपंथियों को खदेड़ने के लिए गोलीबारी शुरू की और जवाब में चरमपंथियों की ओर से भी भारी गोलीबारी की गई। इस भीषण भिड़ंत में सेना के 83 जवान मरे गए और 249 घायल हुए। वहीं 493 चरमपंथी मारे गए और तकरीबन 1592 लोग गिरफ्तार किये गए।

इंदिरा गांधी के इस कदम की काफी आलोचना हुई और इस फैसले के कारण सिख समुदाय और और कांग्रेस के बीच दरार पैदा हो गयी। सिख समुदाय के काफी नेताओं ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। अपने इस कदम की कीमत इंदिरा गांधी को अपनी जान खोकर चुकानी पड़ी जब 31 अक्टूबर को उनके ही दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।

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अटलबिहारी वाजपेयी ने दुर्गा कहकर किया था संबोधित

इंदिरा गांधी की विदेश नीति का लोहा पूरी दुनिया माना करती थी। इंदिरा गांधी ने भारत को अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत को मजबूत पहचान दी। इंदिरा के फैसलों के सामने कई बार पाकिस्तान को घुटने टेकने पड़े। युद्ध के समय इंदिरा गांधी की राजनैतिक बुद्धि और सहस को देखते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिरा गांधी को दुर्गा कहकर संबोधित किया था।


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