बिज़नेस

ये कैसा समाधान- बैंकों को नुकसान, बोलीदाताओं की चांदी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
928
| जून 1 , 2018 , 09:19 IST

कर्ज में डूबी कंपनियों को IBC (Insolvency & Bankruptcy Code) के तहत उबारने की प्रक्रिया में हो रहे विलंब ने अनेक सवाल और वित्तीय उलझनें पैदा कर दी हैं। सोचने की बात यह है कि कर्जदाताओं की समिति की समीक्षा के बाद राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने कई बोलीदाताओं के दावे पर मुहर लगा दी है लेकिन अभी तक किसी भी कंपनी के मामले का निपटारा नहीं हुआ है और यही विलंब कर्जदाता बैंकों को भारी नुकसान और बोलीदाताओं को जबरदस्त फायदे की वजह बन गया है।

पाठकों को जानकर ताज्जुब हो रहा होगा कि वह कौन-सा पेच है जिससे बोलीदाताओं की बल्ले-बल्ले हो रही है। अब देखिये, टाटा स्टील ने भूषण स्टील के लिए लगाई गई बोली में कर्जदाता बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को 35,200 करोड़ रुपये और 12.27% शेयर देने का प्रस्ताव किया। इसके अलावा अपनी समाधान योजना में टाटा स्टील ने कुछ सक्रिय कर्जदाताओं को 1200 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने का प्रस्ताव किया।  

टाटा स्टील की तर्ज पर ही वेदांता ने भी इलेक्ट्रोस्टील के लिए अपनी समाधान योजना प्रस्तुत की जिसमें उसकी सहयोगी कंपनी 1805 करोड़ रुपये में इलेक्ट्रोस्टील कंपनी के शेयर खरीदेगी और कर्ज के रूप में 3515 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड देगी।

ये दोनों ही बोलियां एक निर्धारित तिथि को कंपनियों के विघटन के संदर्भ में किये गए वित्तीय आकलन के आधार पर स्वीकृत की गईं। इसमें विचारणीय विषय यह है कि NCLT के दायरे में आईं अनेक कंपनियां शानदार प्रदर्शन कर रही हैं और अपने कारोबार से अच्छी-खासी नकदी इकट्ठा कर रही हैं।

अब जबकि किसी कंपनी का विघटन एक निर्धारित तारीख को हो गया है और उस तारीख तक की वित्तीय स्थिति भी पेश कर दी गई है, तब विलंब की स्थिति में NCLT के दायरे में आई कंपनी को होने वाले लाभ की गणना नहीं हो पाएगी, जिसका फायदा कर्जदाता बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बजाय बोलीदाता कंपनी को होगा। आदर्श स्थितियों में यह लाभ कर्जदाता कंपनियों के खाते में जाना चाहिए।

इसे समझने के लिए हम भूषण स्टील और इलेक्ट्रोस्टील की तीसरी तिमाही के परिणाम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं...(रिपोर्ट लिखे जाने तक चौथी तिमाही का परिणाम उपलब्ध नहीं था)

Mmmm

अब आप समझ गए होंगे कि किस तरह NCLT के दायरे में आईं कंपनियां बोलीदाताओं के लिए दुधारू गाय साबित हो रही हैं। औद्योगिक विशेषज्ञों के मुताबिक अकेले भूषण स्टील से बोलीदाताओं को 1000 करोड़ रुपये का नकद फायदा सिर्फ एक तिमाही में हो जाएगा। 


कमेंट करें