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INX मीडिया केस: कार्ति को SC से राहत, HC के फैसले पर हस्तक्षेप से इनकार

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 3 , 2018 , 15:40 IST

सुप्रीम कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को बड़ी राहत दी है। जस्टिस एके सीकरी की बेंच ने कार्ति को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली अग्रिम ज़मानत रद्द करने से इनकार कर दिया है।

सीबीआई ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। सीबीआई का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश से निचली अदालत में चल रहे मुकदमे पर असर पड़ेगा। सीबीआई ने याचिका में कहा था कि दिल्‍ली हाईकोर्ट ने गलती से कार्ति को जमानत दे दी।

आपको बता दें कि, इस मामले पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को भी सुप्रीम कोर्ट ने व्यवसाय के उद्देश्य से 23 जुलाई से 31 जुलाई के बीच अमेरिका, फ्रांस और लंदन जाने की इजाजत दे दी है। वहीं इस मामले में आरोपी बनाए गए पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई थी। कोर्ट ने चिदंबरम की गिरफ्तारी पर सात अगस्त तक के लिए रोक लगा दी थी।

क्या कहा जस्टिस एके सीकरी

जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि जब स्वतंत्रता का सवाल होता है, तो अदालतें ऐसी स्थिति में तकनीकी पहलू में नहीं जातीं। बेंच पीठ ने कहा कि वह कार्ति को मिली जमानत में हस्तक्षेप नहीं कर रही, लेकिन कानून का यह प्रश्न विचार के लिए खुला जरूर रख रही है कि क्या निचली कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन लंबित रहने के बावजूद आवेदक हाईकोर्ट का रुख कर सकता है।

क्या है मामला

मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला आइएनएक्स मीडिया कंपनी से जुड़ा है। इसकी डायरेक्टर शीना बोरा हत्याकांड की आरोपी इंद्राणी मुखर्जी थी। इस मामले में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआइपीबी) की 305 करोड़ रुपये की मंजूरी के संबंध में कथित भूमिका के लिए जांच एजेंसियों के दायरे में आए हैं। सीबीआइ ने 2007 में 305 करोड़ रुपये की विदेशी निधि हासिल करने के लिए आइएनएक्स मीडिया को एफआइपीबी से मिली मंजूरी में कथित अनियमितता की शिकायत पाई। जिसके बाद पिछले साल 15 मई को एफआइआर दर्ज की थी।

फोरम शॉपिंग मामले का संदेह

सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह सवाल खुला रखा जाना चाहिए, क्योंकि हाईकोर्ट के समवर्ती अधिकार क्षेत्र के अधिकारों का आह्वान करना फोरम शॉपिंग का मामला हो सकता है। फोरम शॉपिंग का मतलब अपने मामले की सुनवाई के लिए याचिकाकर्ता द्वारा राहत के लिए अलग अलग मंच पर जाना है। याचिककर्ता मानता है कि चयनित फोरम से उसे वह फैसला मिल सकता है जो वह चाहता है. फोरम शॉपिंग तब संभव होता है, जब कई अदालतों के पास याचिकाकर्ता के दावे को लेकर समवर्ती अधिकार क्षेत्र होता है।

कब तक राहत से इनकार नहीं किया जाए

कार्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि पहले से ही इस बारे में एक फैसला है, जिसमें हाईकोर्ट के समवर्ती अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया जा सकता है। बता दें कि हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश की पीठ ने 23 मार्च को कार्ति को जमानत दी थी। तब पीठ ने कहा था कि जब तक कठोरतम दंड वाला अत्यधिक गंभीर अपराध नहीं हो तब तक राहत से इनकार नहीं किया जाना चाहिए।

कहां से हुआ था कार्ति की गिरफ्तारी

सीबीआई ने कार्ति को 28 फरवरी को चेन्नई से गिरफ्तार किया था. यह गिरफ्तारी पिछले साल 15 मई को दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई थी।

305 करोड़ का फंड हासिल करने का मामला

इस प्राथमिकी में कार्ति पर वर्ष 2007 में विदेशों से करीब 305 करोड़ रुपए का कोष हासिल करने के लिए आईएनएक्स मीडिया को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड(एफआईपीबी) की मंजूरी देने में अनियमितताओं से संबंधित है।

10 लाख रुपए से 10 लाख डॉलर बताया

शुरू में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि कार्ति ने आईएनएक्स मीडिया को एफआईपीबी की मंजूरी दिलाने में सुगमता के लिए 10 लाख रुपए की रिश्वत ली थी. बाद में यह राशि दस लाख अमेरिकी डॉलर बताई गई।

बेटे और पिता ने किया था आरोपों से इनकार

कांग्रेस के सीनियर लीडर और पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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