राजनीति

हमारे जवानों की शहादत की कीमत पर पत्थरबाज़ों को माफी क्यों महबूबा जी?

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 22 , 2018 , 17:57 IST

जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को कहा कि उनकी सरकार कश्मीर घाटी में दूसरी बार पथराव करने वालों लोगों को क्षमादान देने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने राज्य के ऊपरी सदन में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा,

"सरकार विरोध प्रदर्शनों के दौरान पथराव में दूसरी बार संलिप्त दोषियों के मामलों पर पुनर्विचार कर रही है।"

सरकार ने इससे पहले सुरक्षा बलों पर पहली बार पथराव करने वालों के खिलाफ मामला वापस लेने के आदेश दिए थे।

जब तक ये मामले वापस नहीं लिए जाते, उक्त व्यक्ति सरकारी नौकरी नहीं पा सकते।

 पर जवान शहीद हो रहे हैं ..1 (2)

कश्मीर के हालात को हमेशा बेरोजगारी से जोड़ा जाता रहा है। जब 1990 के दशक में कश्मीरियों ने बंदूक उठाई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला भी यह कहने से चूकते नहीं थे कि बेरोजगारी से त्रस्त कश्मीरी बंदूक उठाने को मजबूर हुआ है। और अब जब कश्मीरियों ने बंदूक की जगह पत्थर उठाए तो भी तर्क वही हैं। कश्मीरी कौम कभी झगड़ालू नहीं रही है। तभी तो दो कश्मीरियों की लड़ाई एक-दूसरे पर कांगड़ियों को फेंकने से अधिक कभी नहीं बढ़ पाई थी। मगर अब पत्थरबाजी के हथियार से वे बड़े-बड़ों को डरा रहे हैं। अगर यूं कहें कि कश्मीर और कश्मीर आने वाले पत्थरबाजी के बंधक बन चुके हैं तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

सवाल यह उठता है कि आखिर अचानक कैसे कश्मीर में पत्थरबाज पैदा हो गए। इस पर हैरानगी सिर्फ राजनीतिक पंडितों को ही नहीं बल्कि हुर्रियत नेताओं को भी है। वे हैरान हैं। परेशान भी हैं। उनकी परेशानी यह है कि पत्थरबाज रूपी उनके कथित समर्थक उनका भी कहना मानने को राजी नहीं हैं। अगर कट्टरपंथी सईद अली शाह गिलानी हड़ताल न करने और उसके स्थान पर कोई विकल्प तलाशने को बुद्धिजीवियों की राय मांगते थे तो पत्थरबाज उनके आह्वान को ठेंगे पर रखते हुए अपनी उस दुकान को जारी रखते थे जिसे पोषित करने वाले अब नेशनल कांफ्रेंस के साथ-साथ हुर्रियत कांफ्रेंस के निशाने पर भी हैं।

आम कश्मीरी से लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और हुर्रियत कांफ्रेंस तक के इशारे और बयान का निशाना पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ही है। हुर्रियत के मौलवी अब्बास अंसारी कहते हैं कि पीडीपी पत्थरबाजों को शह दे रही है तो उमर अब्दुल्ला अपने संदेश में स्पष्ट तौर पर कहते थे कि पीडीपी नेताओं के बच्चे और रिश्तेदार पत्थरबाजी में लिप्त हैं जो सत्ता हाथ से चले जाने के बाद से ही उनकी सरकार को क्षति पहुंचाने के इरादों से अवसर ढूंढ रहे थे। अगर आम कश्मीरी की बात सुनें तो उनके उस वक्तव्य से गहरे अर्थ निकाले जा सकते हैं जिसमें वे कहते थे कि कांग्रेस-पीडीपी की सरकार में ऐसा नहीं होता था।

वर्तमान परिस्थितियों के लिए सिर्फ पीडीपी को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता। पाकिस्तानी सेना की खुफिया संस्था आईएसआई लश्कर-ए- तैयबा के साथ मिल कर नई-नई चालें कश्मीर की बर्बादी के लिए चल रही हैं। सीमाओं पर सीजफायर शुरू होने से पहले तक कश्मीर में गरजती बंदूकों के लिए असलाह इस ओर आने में कोई परेशानी नहीं थी तो आतंकियों की बंदूकें कश्मीर भर में दनदनाती रही थीं। और सीजफायर के बाद पाकिस्तान ने रणनीति बदल ली। कश्मीर में पत्थरबाजों की फौज को तैयार कर दिया गया। यह सवाल अलग है कि पत्थरबाजों को कौन पाल रहा है, लेकिन उन्हें शह, पैसा और रणनीति पाकिस्तान समर्थित लश्करे तैयबा की ओर से ही मिल रही है इसके प्रति अब कोई शक नहीं रह गया है।


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