राजनीति

जेटली ने कांग्रेस पर साधा वंशवादी निशाना, पूछा-'गांधी और पटेल के पिता कौन थे?'

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 27 , 2018 , 15:43 IST

कांग्रेस नेताओं की टिप्पनी विवाद थमने का नाम नही ले रहा हैं। वही प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी के माता-पिता के नाम पूछने की इस मसले पर मोदी के बाद अब अरूण जेटली भी मैदान में कूद गए हैं। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कांग्रेस पर वंशवादी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि इस पार्टी ने कई बड़े नेताओं के योगदान को कम करके दिखाया। जेटली ने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लाखों राजनीतिक कार्यकर्ता जो साधारण परिवार से आते हैं वे कांग्रेस के लीडरशिप टेस्ट में फेल हो जाएंगे। यहां मेरिट, मेधा कोई मायने ही नहीं रखती है। कांग्रेस केवल एक ग्रेट सरनेम को ही पॉलिटिकल ब्रैंड के रूप में स्वीकार करती है। जेटली ने देश को दो बड़े नेताओं के पिता का नाम पूछ वित्त मंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।

जेटली ने फेसबुक पर लिखे अपने ब्लॉग में लिखा है कि इन सब बातों को सुनने के बाद मैंने अपने कुछ जानकार दोस्तों से तीन सवाल पूछे-

1-गांधीजी के पिता का क्या नाम था?

2-सरदार पटेल के पिता का क्या नाम था?

3-सरदार पटेल की पत्नी का क्या नाम था?

फेसबुक पर उन्होंने लिखा कि 'मेरे किसी भी जानकार दोस्त के पास इन सवालों का स्पष्ट उत्तर नहीं था। यही कांग्रेस की राजनीति की त्रासदी है। गांधीजी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने राजनीतिक जागरूकता, सत्याग्रह और अहिंसा के जरिए लोगों को जगाया। उन्होंने ऐसा माहौल बनाया जिसके कारण ब्रिटिश का भारत में रहने मुश्किल हो गया। सरदार पटेल का योगदान भी कम नहीं है। स्वतंत्रता सेनानी होने के अलावा वह भारत के डेप्युटी पीएम और गृह मंत्री थे। उन्होंने ब्रिटिश से सत्ता हस्तांतरण पर बात की थी। उन्होंने भारत की 550 रियासतों को एक किया था। गांधीजी के पिताजी का नाम करमचंद उत्तमचंद गांधी, सरदार पटेल के पिता का नाम झावेरभाई पटेल और उनकी पत्नी का नाम दिवाली बा था। हालांकि पटेल की पत्नी की फोटो या उनकी डीटेल तमाम रिसर्च और कोशिशों के बाद भी उपलब्ध नहीं हो पाई है।'

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जेटली ने कांग्रेस पर हमला बोलते लिखा, 'इसका सीधा सा कारण है। दशकों के कांग्रेस के शासनकाल में कॉलोनियों, स्थानों, शहरों, पुलों, एयरपोर्ट्स, रेलवे स्टेशनों, स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, स्टेडियमों का नाम केवल एक फैमिली के ऊपर रखा गया। इसका मकसद 'गांधी' नाम को भारत रॉयल्टी के तरह दिखाना था। इन्हें आधिकारिक तौर पर भारत की रसूखदार परिवार का तरह महिमामंडित किया गया।'

एक परिवार को इस तरह महिमामंडित करना और वह भी उससे ज्यादा योगदान देने वाले लोगों को भुलाकर, यह देश के लिए खतरनाक है। सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे महान नेताओं के योगदान को कम दिखाया गया है। एक ही परिवार के लोगों को लार्जर देन लाइफ के तौर पर प्रॉजेक्ट करके दिखाया गया। पार्टी ने उनके विचारधार को अपना लिया। जब पंडितजी (जवाहर लाल नेहरू) ने अपनी बेटी को अपनी विरासत सौंपी तभी उन्होंने वंशवादी लोकतंत्र की नींव रख दी।

वित्तमंत्री ने आगे अपने ब्लॉंग पर लिखा है कि देश को वंशवादी राजनीति का खामियाजा भी भुगतना पड़ा। तीन परिवार, जिनमें दो श्रीनगर और एक नई दिल्ली में हैं, पिछले 71 साल जम्मू-कश्मीर के भाग्य के साथ खेल रहे हैं। कांग्रेस की वंशवादी राजनीति को दूसरे दलों ने भी अपनाया। ऐसे संगठनों में आंतरिक लोकतंत्र नहीं होता है।

भारतीय लोकतंत्र की मजबूती तभी और सामने आएगी जब एक परिवार का करिश्मा को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया जाएगा और लोकतांत्रिक और मेरिट पर चुने गए नेताओं को आगे बढ़ाया जाएगा। 2014 में ऐसा साबित भी हुआ है। इन चुनावों में ज्यादातर वंशवादी पार्टियां चुनाव हार गईं। 2019 का भारत 1971 के भारत से अलग है। अगर कांग्रेस पार्टी यह चाहती है कि 2019 की लड़ाई कम चर्चित माता-पिता के बेटे मोदी और अपनी माता-पिता की वजह से ही चर्चा में रहने वाले से हो तो बीजेपी खुशी-खुशी यह चुनौती स्वीकार करेगी।


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