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सुप्रीम कोर्ट में 35A पर सुनवाई 8 हफ्ते के लिए टली, अलगाववादी कर रहे थे विरोध

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| अक्टूबर 30 , 2017 , 16:41 IST

संविधान के आर्टिकल 35(A) की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने हलफनामा दायर कर नोटिस पर जवाब देने के लिए 8 हफ्ते का वक्त मांगा है। जिसके बाद कोर्ट ने 35A की सुनवाई टाल दी है।

आर्टिकल 35(A) को खत्म करने की मांग को लेकर कोर्ट में 4 याचिकाएं दायर की गई हैं जिसपर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए. एम. खानविलकर और जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ की पीठ ने सुनवाई की। मुख्य याचिका को दिल्ली की एक गैरसरकारी संस्था 'वी द सिटिजन्स' ने 2014 में दायर किया था बाद में इसी तरह की 3 और याचिकाएं दायर हुईं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ जोड़ दिया।

क्या है अनुच्छेद 35ए:

दरअसल अनुच्छेद 35ए भारतीय संविधान में एक 'प्रेंसीडेशियल आर्डर' के जरिये 1954 में जोड़ा गया था। यह राज्य विधानमंडल को कानून बनाने की कुछ विशेष शक्तियां देता है। इसमें वहां की विधानसभा को स्थायी निवासियों की परिभाषा तय करने का अधिकार मिलता है, जिससे अन्य राज्यों के लोगों को कश्मीर में जमीन खरीदने, सरकारी नौकरी करने या विधानसभा चुनाव में वोट करने पर रोक है।

इस कानून के खिलाफ दिल्ली स्थित एनजीओ 'वी द सिटीजन' ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर इसे खत्म करने की अपील की थी. इस याचिका में कहा गया कि अनुच्छेद 35ए के कारण संविधान प्रदत्त नागरिकों के मूल अधिकार जम्मू-कश्मीर में छीन लिए गए हैं, लिहाजा राष्ट्रपति के आदेश से लागू इस धारा को केंद्र सरकार फौरन रद्द करे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अगस्त माह में सुनवाई करते हुए मामले को 6 हफ्ते के लिए टाल दिया था। तब कोर्ट ने कहा था कि बेंच अनुच्छेद 35ए और अनुच्छेद 370 की सैंविधानिकता की जांच करेगी और इसके तहत मिलने वाला स्पेशल स्टेटस का दर्जा का भी रिव्यू होगा। वहीं जम्मू-कश्मीर सरकार ने कोर्ट में कहा है कि 2002 में इस मुद्दे पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था, जिससे यह मामला सेटल हो गया था।

अलगाववादियों ने दी धमकी:

आर्टिकल 35A को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर के 3 बड़े अलगाववादियों ने घाटी में माहौल खराब करने की धमकी दी है। याचिका के पक्ष में फैसला आने पर अलगाववादियों ने लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सूची के विषय से छेड़छाड़ फिलिस्तीन जैसी स्थिति पैदा करेगा।

रविवार को एक संयुक्त बयान में अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासिन मलिक ने कहा, 'यदि सुप्रीम कोर्ट राज्य के लोगों के हितों और आकांक्षा के खिलाफ कोई फैसला देता है तो लोग जनआंदोलन शुरू करें।'


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