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SC में जस्टिस जोसेफ ने तीसरे नंबर पर ली शपथ, विपक्ष बोला- इतिहास का काला दिन

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 7 , 2018 , 14:45 IST

वरीयता विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में तीन जज जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस के एम जोसेफ ने आज शपथ  ग्रहण की। CJI दीपक मिश्रा ने तीनों जजों को शपथ दिलाई। इन तीन नियुक्तियों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 25 हो गई है, जबकि कोर्ट में 31 जजों के पद हैं। जस्टिस इंदिरा बनर्जी सुप्रीम कोर्ट के 68 साल के इतिहास में आठवीं महिला जज हो गई हैं और पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एक साथ तीन महिला जज होंगी। इससे पहले दो महिला जज ही कोर्ट में रह चुकी हैं। हालांकि जस्टिस जोसेफ को सीनियरिटी में तीसरे नंबर पर रखे जाने पर कुछ वकीलों, जजों और विपक्ष ने सवाल उठा दिए हैं। तो वहीं केंद्र सरकार ने कहा है कि इस दलील में कोई दम नहीं है।

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इसे भारतीय न्यायपालिका के इतिहास का काला दिन बताया। उन्होंने कहा, "सरकार यह संदेश देना चाहती है कि अगर जज उसके पक्ष में फैसले नहीं सुनाते तो उनके साथ ऐसा ही होगा।। यह सरकार का अहंकार है।" 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों ने कल चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराया और सूत्रों के मुताबिक चीफ जस्टिस ने कहा कि ये मामला शपथ के बाद देखा जाएगा। शपथ के क्रम पर सवाल उठाने वालों का आरोप है कि जस्टिस जोसेफ शपथ लेने वाले बाकी दो जजों से सीनियर हैं क्योंकि वो उन दोनों से पहले हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बन गए थे लेकिन नियमों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में सीनियोरिटी तय करने के लिए हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस बनने की तारीख पैमाना नहीं होती है।

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सीनियोरिटी के लिए हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति की तारीख अहम होती है, यही वजह है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को सुप्रीम कोर्ट में चुना जाए ये जरूरी नहीं होता। जस्टिस दीपक मिश्रा 17 जनवरी 1996 को हाईकोर्ट के जज बने थे, जस्टिस चेलमेश्वर 23 जून 1997 को हाईकोर्ट के जज बने और 3 मई 2007 को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस। वहीं जस्टिस दीपक मिश्रा 23 दिसंबर 2009 को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने थे। इन दोनों को सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट जजों की ऑल इंडिया सीनियोरिटी के हिसाब से शपथ दिलाई गई।


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