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जयेंद्र सरस्वती को गुरु के बगल में दी गई महासमाधि, लाखों लोगों ने किया अंतिम दर्शन

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 1 , 2018 , 10:43 IST

कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य श्री जयेंद्र सरस्वती को आज मठ परिसर में उनके गुरु के बगल में महासमाधि दी गई। उनके अंतिम संस्कार में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी समेत दक्षिण की कई बड़ी हस्तियां शामिल हुए। श्री जयेंद्र सरस्वती का निधन बुधवार को हुआ था। वह 82 वर्ष के थे।

जयेंद्र सरस्वती को सांस लेने में आ रही दिक्कत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था, इलाज के दौरान उनका देहांत हुआ। भारी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन कर चुके है। जयेंद्र सरस्वती के निधन के बाद अब शंकर विजयेंद्र सरस्वती कांचीपुरम पीठ के 70वें शंकराचार्य होंगे।

कौन थे जयेंद्र सरस्वती:

जयेंद्र सरस्वती को शंकाराचार्य बनाए जाने से पहले सुब्रमण्यम अय्यर के नाम से जाना जाता था। उनका जन्म 18 जुलाई 1935 को तमिलनाडु के कांचीपुरम में हुआ था। कांचीपुरम मठ के 68वें शंकराचार्य श्री चंद्रशेखर सरस्वती स्वामीगल ने 22 मार्च 1954 को उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।

जयेंद्र सरस्वती ने 1983 में शंकर विजयेंद्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। बता दें कि कांचीपुरम मठ की स्थापना आदिगुरू शंकराचार्य ने 5वीं शताब्दि में की थी। ये मठ कई स्कूल, क्लीनिक और हॉस्पिटल भी चलाता है।
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क्या है कांची मठ:

बता दें कि कांची मठ कांचीपुरम में स्थापित एक हिंदू मठ है। यह पांच पंचभूतस्थलों में से एक है। यहां के मठाधीश्वर को शंकराचार्य कहते हैं। कांची कामकोटि पीठ के 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का इस पद पर आसीन होने से पहले का नाम सुब्रमण्यम था।

 


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