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INX Media केस: पी चिदंबरम तक पहुंची जांच, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से पूछताछ

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 6 , 2018 , 10:33 IST

आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश को मंजूरी देने के मामले में कार्ति चिदंबरम से मिलीभगत के आरोप पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) के पूर्व सदस्यों से पूछताछ करेगा। इस कदम से जांच यूपीए सरकार के दौरान वित्त मंत्रालय के कामकाज के करीब पहुंच गई है। एफआईपीबी को कथित तौर पर प्रभावित करने के आरोप में कार्ति से अभी न्यायिक हिरासत में पूछताछ चल रही है।

एफआईपीबी को पिछले साल भंग कर दिया गया था। आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव इसके प्रमुख हुआ करते थे। एफआईपीबी में डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी ऐंड प्रमोशन (डीआईपीपी), वाणिज्य और विदेश मंत्रालयों का भी प्रतिनिधित्व हुआ करता था।

आधा दर्जन अधिकारियों को भेजे गए नोटिस

कार्ति के खिलाफ चल रही जांच से वाकिफ अधिकारियों ने अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि आधा दर्जन अधिकारियों को नोटिस भेजे गए हैं, जो उस वक्त एफआईपीबी से जुड़े हुए थे जब आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश को मंजूरी मिली थी। एक अधिकारी ने बताया कि जांच एजेंसियों ने इंद्राणी और पीटर मुखर्जी की कंपनी आईएनएक्स मीडिया को मिली एफआईपीबी की मंजूरी की बारीक पड़ताल करने के बाद नोटिस जारी किए हैं।

इससे पहले कार्ति के वकीलों ने कहा था कि एजेंसियां एफआईपीबी के अधिकारियों से पूछताछ नहीं कर रही हैं, जबकि एफआईआर में अज्ञात एफआईपीबी मेंबर्स और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का जिक्र किया गया है। इसलिए ईडी के इस कदम की काफी अहमियत है। जांच एजेंसियों ने यह नहीं बताया कि किन अधिकारियों को नोटिस भेजे गए हैं। एक बड़े अधिकारी ने बताया, ‘संबंधित एफआईपीबी अप्रूवल की पड़ताल के बाद नोटिस जारी किए गए हैं।’ इसके अलावा कार्ति के मालिकाना हक वाली चार कंपनियों को घूस देने के मामलों की भी जांच चल रही है।

रिश्वत देने की सबूत तलाश रही है जांच एजेंसी

एक अधिकारी ने बताया, ‘एक केस दर्ज किया गया है, जबकि चार में अभी जांच चल रही है। ईडी ने जो चार कंप्लेन भेजी हैं, उनमें सीबीआई अगर किसी में केस दर्ज करती है तो हमारी तरफ से जरूरी कार्रवाई शुरू की जाएगी।’ जांच एजेंसियां रिश्वत देने के सबूत भी तलाश रही हैं। उनका कहना है कि इससे कथित तौर पर उन कंपनियों के बारे में जानकारी मिल सकती है, जिन्हें कार्ति और उनके संपर्कों की वजह से फायदा हुआ था।

चिदंबरम का नाम FIR में नहीं

तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम का नाम सीबीआई की एफआईआर में नहीं है, लेकिन जांच एजेंसी ने कहा है कि वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने तब विदेशी निवेश के प्रस्ताव को मंजूरी देने में पक्षपात किया था। अडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के चार ‘मालिकों’ से भी कुछ पेमेंट्स के बारे में पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसियों को शक है कि यह पैसा एफआईपीबी क्लियरेंस को मैनेज करने के लिए कार्ति को दिया गया था। इस बीच, मंगलवार को सीबीआई कार्ति की हिरासत की अवधि बढ़ाने की मांग कर सकती है।


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