नेशनल

कार्तिक पूर्णिमा: सिख और सनातन धर्म के लिए है बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1421
| नवंबर 23 , 2018 , 12:05 IST

23 नवंबर यानी आज कार्तिक पूर्णिमा है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहते हैं। सनातन धर्म के लिए कार्तिक पूर्णिमा बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन महादेव ने त्रिपुरासुर नामक असुर का संहार किया था। इसी कारण से इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं। पूर्णिमा तिथि पूर्णत्व की तिथि मानी जाती है। इस तिथि के स्वामी स्वयं चन्द्रदेव हैं। इस तिथि को चन्द्रमा सम्पूर्ण होता है। आज के दिन सूर्य और चन्द्रमा समसप्तक होते हैं।

Gggइस तिथि पर जल और वातावरण में विशेष उर्जा आ जाती है। इसी कारण से नदियों और सरोवरों में स्नान किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योकि इस दिन नौ ग्रहों की कृपा आसानी से पायी जा सकती है। इस अवसर पर पवित्र नदी का स्नान, दीपदान, भगवान की पूजा, आरती, हवन तथा दान का बहुत महत्व है।

Ganga_Dashara_at_Haridwar (1)आपको बता दें कि कार्तिक पूर्ण‍िमा सिख धर्म के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सिखों के पहले गुरु, गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था। इस दिवस को सिख धर्म में प्रकाशोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इसे गुरुनानक जयंती भी कहते हैं। गुरुनानक जयंती के मौके पर गुरुद्वारों में खास पाठ का आयोजन किया जाता है। सुबह से शाम तक की‍र्तन होता है और इसके अलावा लंगर छकने का भी आयोजन किया जाता है। इसके लिए भी काफी भीड़ उमड़ती है।

जानिए क्या करें इस कार्तिक पूर्णिमा को:

 1.प्रातः काल उठकर व्रत रहने का संकल्प लें। गंगा या किसी पवित्र नदी में करें स्नान।

2.श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें।

3.श्री रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें।

4.इस पवित्र दिन पर चंद्रोदय के समय शिवा, सम्भूति, प्रीति, अनुसुइया तथा छमा इन 6 कृतिकाओं का पूजन करें।

5.इस दिन गो दान का फल अनंत पुण्यदायी है।

6.घी और अन्न का दान करें।

7.पूजन और हवन करें।

8.इस दिन मंदिर में भंडारा करवाएं।

9.दीपदान संध्याकाल में ही करें।  इसके निवारण के लिए घी, मक्खन और सफ़ेद तिल आदि का दान करें।


कमेंट करें