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Karva Chauth 2018: बिना कथा पढ़े अधूरा है आपका करवा चौथ, पढ़िए कथा की विधि

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 27 , 2018 , 14:02 IST

सुहाग, सौभाग्य और समृद्धि का त्योहार करवाचौथ सभी सुहागिनों के लिए सबसे खास होता है। महिलाएं दिन भर भूखी-प्यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। यही नहीं कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर पाने के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। सुहागनें इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत शुरू करती हैं और रात में चंद्रमा को छलनी से देखकर पति का आशीर्वाद लेकर व्रत खोलती हैं। करवा चौथ के दिन व्रत कथा पढ़ना भी अनिवार्य माना जाना है।

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व्रत का समय
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तो करवा चौथ का व्रत किया जाता है, 27 अक्टूबर आज यह व्रत किया जाएगा। इस व्रत में शाम को करवा चौथ की कहानी पढ़ी जाती है।
पूजा मुहूर्त-सायंकाल 6:35- रात 8:00 बजे तक

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करवा चौथ व्रत कथा
मान्यताओं के मुताबिक एक साहुकार के सात बेटे और एक बेटी थी, करवा चौथ का दिन था, साहुकार की पत्नी, बहुओं और बेटी ने करना चौथ का व्रत रखा था। रात्रि को साहुकार के लड़के भोजन करने लगे तो उन्होंने अपनी बहन से भोजन के लिए कहा। इस पर बहन ने बताया कि उसाका आज व्रत है और वह खाना चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही खा सकती है। सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। जो ऐसा प्रतीत होता है जैसे चतुर्थी का चांद हो। उसे देख कर वह अर्घ्य देकर खाना खाने बैठ जाती है, जैसे ही वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और तीसरा टुकड़ा मुंह में डालती है तभी उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। जिसके बाद वो बेहद दुखी हो जाती है।

उसकी भाभी सच्चाई बताती हैं कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। जब उसे अहसास होता है कि व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उसके इस गलती से पति की मृत्यु हो गई तो वह इस पर निश्चय करती है कि अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं करेगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। इसका पश्चाताप के लिए वो भगवान गणेश की पूरे विधि-विधान से पूजा की और चतुर्थी का व्रत करना शुरू कर दिया। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घस को वह एकत्रित करती जाती है।

एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है, तो वह व्रत रखती है और शाम को सुहागिनों से अनुरेध करती है कि 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे अपनी जैसी सुहागिन बना दो' लेकिन सारी औरतें यह करने से मना कर देती। आखिर में एक सुहागिन उसकी बात मान लेती है। इस तरह से उसका व्रत पूरा होता है। और भगवान गणेश इसकी भक्ति को देख प्रसन्न हुए और इसके पति को स्वस्थ्य जीवन दान दिया। इसी कथा को कुछ अलग तरह से सभी व्रत करने वाली महिलाएं पढ़ती और सुनाती हैं।

इस पौराणिक कथा के समय से ही हिन्दू कैलेंडर के अनुसार करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास की चतुर्थी को मनाया जाने लगा। वहीं अंग्रेजी कैलेंडक के अनुसार यह त्यौहार अक्टूबर के महीने में आता है।

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