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केंद्रीय विद्यालयों में हिंदी-संस्कृत में ही प्रार्थना क्यों? SC ने सरकार से मांगा जवाब

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 10 , 2018 , 13:54 IST

असतो मा सदगमय!

तमसो मा ज्योतिर्गमय!

मृत्योर्मामृतं गमय!

अब वेद की ये ऋचाएं भी सुप्रीम कोर्ट में घसीट दी गई हैं। केंद्रीय विद्यालयों में हर रोज सुबह होने वाली हिंदी-संस्कृत की प्रार्थनाओं पर विवाद खड़ा हो गया है। पूरा विवाद केंद्रीय विद्यालयों में इन ऋचाओं को दैनिक प्रार्थना में शामिल करने को लेकर है। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

प्रार्थना से किसी खास धार्मिक मान्यता को बढ़ावा मिल रही है- कोर्ट

याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय विद्यालय संगठन को नोटिस जारी कर पूछा है कि रोजाना सुबह स्कूल में होने वाली हिंदी और संस्कृत की प्रार्थना से किसी धार्मिक मान्यता को बढ़ावा मिल रहा है? इसकी जगह कोई सर्वमान्य प्रार्थना क्यों नहीं कराई जा सकती? इन तमाम सवालों के जवाब कोर्ट ने 4 हफ्ते में तलब किये हैं।

Prayer 2

सुप्रीम कोर्ट में विनायक शाह ने याचिका लगाई है, जिनके बच्चे केंद्रीय विद्यालय में पढ़े हैं। याचिका के मुताबिक देश भर में पिछले 50 सालों से 1125 केंद्रीय विद्यालयों की प्रार्थना में ये ऋचाएं शामिल हैं। इस प्रार्थना में और भी ऋचाएं शामिल हैं, जिनमें एकता और संगठित होने का संदेश है। जैसे,

ओम् सहनाववतु, सहनौ भुनक्तु: सहवीर्यं करवावहै. तेजस्विना वधीतमस्तु मा विद्विषावहै!

उपर्युक्त मंत्र भोजन से संबंधित है, जिसका भोजन ग्रहण करने से पहले पाठ किया जाता है। बता दें कि केवल केंद्रीय विद्यालयों में ही नहीं बल्कि कई सारे राज्यों के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में भी कक्षाओं से पहले हर सुबह प्रार्थना का आयोजन किया जाता है। कोर्ट इस याचिका पर अगली सुनवाई में केंद्र के जवाब पर विचार करेगा।

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