विज्ञान/टेक्नोलॉजी

1 किलोग्राम में होगा बड़ा बदलाव, 60 देशों के वोटिंग के बाद बनी सहमति

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
2057
| नवंबर 18 , 2018 , 11:43 IST

एक ऐतिहासिक मतदान में, 60 से अधिक देशों ने सर्व-सम्मति अंतरराष्ट्रीय मापन प्रणाली में परिवर्तन को अनुमति दे दी है। शुक्रवार को हुये इस निर्णय से वजन मापने की इकाई किलोग्राम और मापन की दूसरी इकाईयों की नयी परिभाषाएं तय होने का मार्ग प्रशस्त हो गया। इससे विभिन्न देशों के मध्य व्यापार और अन्य मानवीय कार्यों पर प्रभाव पड़ेगा।

 

 

4

वर्साय में एकत्र हुये ऐसे तमाम वैज्ञानिकों ने, जिन्होंने इसके लिए दशकों इंतजार किया था, नए फैसले पर तालियां बजाईं और खुशी जाहिर की, यहां तक कि कुछ प्रतिनिधियों की आंखों में आंसू भी आ गये। इस कदम को मानवता के मापन और गुणन के विश्व में क्रांति के रूप में देखा जा रहा है।

शुक्रवार को ही विद्युत मापन की इकाई ऐम्पियर, ताप मापने की इकाई कैल्विन और पदार्थ की मात्रा माप मोल की नई परिभाषाओं को भी अनुमोदन मिल गया है। वैश्विक रूप से स्वीकृत किलोग्राम की नई परिभाषा का बहुत बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था।

5

बीते एक सदी से अधिक समय से फ्रांस में कड़ी सुरक्षा में रखे प्लेटिनम-इरीडियम मिश्र धातु के बने एक सिलेंडर के द्रव्यमान को किलोग्राम की परिभाषा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसे ‘‘ली ग्रांड के’’ के नाम से भी जाना जाता है। यह साल 1889 से विश्व का एकमात्र वास्तविक किलोग्राम माना जाता रहा है। मतदान के बाद किलोग्राम और अन्य मुख्य मानक इकाईयों को दोबारा परिभाषित किया जायेगा। ये 20 मई से प्रभावी होगा।

तो इस प्रकार से तय होगा किलोग्राम का मापन-:

16 नवम्बर 2018 को फ्रांस के वर्साय में जनरल कॉन्फ्रेंस ऑन वेट्स एंड मेजर्स में 60 देशों के प्रतिनिधियों ने वोट के जरिए तय किया कि अब से किलोग्राम को प्लांक कॉन्स्टेन्ट के आधार पर मापा जाएगा। इसे मापने के लिए किब्बल तराजू का उपयोग होगा जो करंट से संचालित होता है।

3

लिहाजा एम्पीयर (करंट की यूनिट), केल्विन (ठंडे तापमान की यूनिट) और मोल (पदार्थ की मात्रा की यूनिट) में भी बदलाव होंगे। इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स के डायरेक्टर मार्टिन मिल्टन का कहना है कि इस बेसिक यूनिट को दोबारा परिभाषित करना विज्ञान के लिए बड़ा क्षण है।

129 साल पुराना है ये बाट-:

'ली ग्रैंड के' 129 वर्ष पुराना बाट है। वैज्ञानिकों ने एक किलोग्राम के इस सबसे बड़े मानक को बदलने का फैसला कर लिया, क्योंकि इस बाट का क्षरण हो रहा था। कुछ साल पहले इस एक किलो के बाट में 30 माइक्रोग्राम का फर्क आया था। ये फर्क सिर्फ एक चीनी के दाने जितना है, लेकिन विज्ञान की दुनिया के लिए ये फर्क बहुत बड़ा है।

2

1 किलोग्राम के लिए 1889 में बना था खास बाट-:

1795 में 1 किलोग्राम को 4 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले 1 लीटर पानी के वजन के बराबर माना गया। 1889 से प्लेटिनम और इरीडियम मेटल को मिलाकर एक सिलेंडरनुमा बांट बनाया गया। इसे इंटरनेशनल प्रोटोटाइप ऑफ किलोग्राम (IPK) कहा गया।

1

इस वजन को 16 नवम्बर 2018 तक 1 किलोग्राम के बराबर माना जाता रहा। यह प्रोटोटाइप 1879 में जॉनसन मैटहे ने डिजाइन किया था। इसके हूबहू आकार और वजन वाले 6 और सिलेंडर बनाए गए थे, जिन्हें फ्रांस के इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स में रखा गया है। 

बदलेंगे मीटर और सेकेंड भी -:

किलोग्राम के बाद कुछ और इकाइयों को मापने के लिए भी प्राकृतिक वस्तुओं का आधार लिया जाएगा। मई 2019 के बाद मीटर और सेकेंड के साथ-साथ कुछ और इकाइयों के मानकों की परिभाषा में भी बदलाव होगा। वैज्ञानिकों ने ये फैसला किया है कि अब माप के लिए प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।


कमेंट करें