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चला जाता हूँ, किसी की धुन में... एक 'खंडवावाला' जिसे मुंबई कभी नहीं भायी (जन्मतिथि विशेष)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| अगस्त 5 , 2018 , 11:08 IST

पान सो पदारथ, सब जहान को सुधारत, गायन को बढ़ावत जामें चूना चौकसाई है,

सुपारिन के साथ..साथ मसाल मिले भांत..भांत,

जामें कत्थे की रत्तीभर थोड़ी..सी ललाई है।

बैठे हैं सभा मांहि बात करें भांत..भांत,

थूकन जात बार..बार जाने का बड़ाई है।

कहें कवि किसोरदास चतुरन की चतुराई साथ,

पान में तमाखू किसी मूरख ने चलाई है।
                                                     - किशोर कुमार

किशोर कुमार का जन्म मध्यप्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को मध्यवर्गीय बंगाली परिवार में हुआ। खंडवा के जाने माने वकील कुंजी लाल गांगुली के घर जब सबसे छोटे बालक ने जन्म लिया तो कौन जानता था कि आगे चलकर यह बालक एक महान गायक बन कर अपने देश और परिवार का नाम रोशन करेगा।

'एक्टिंग से नफरत'

साल 1985 में पत्रकार प्रितिश नंदी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, 'मैं अब सिर्फ गाना चाहता हूं। कभी एक्टिंग नहीं करूंगा। मैंने जब भी एक्टिंग की है, मुझे बेहद नफरत हुई है। मैं उन हालातों को कोसता हूं, जब मुझे एक्टिंग करनी पड़ी।

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संगीत की शुरुआत-:

शुरुआत में किशोर कुमार को गंभीरता से नहीं लिया गया। ऐसे में जानेमाने संगीतकार एस डी बर्मन ने उन्‍हें सलाह दी कि वो सहगल साहब को कॉपी करने की बजाय खुद का स्टाइल अपनाये। इसके बाद वर्ष 1957 में उन्‍होंने फ़िल्म 'फंटूस' में एक सैड गाने को अपनी आवाज दी और उनकी आवाज दुखरी मन को झंकृत करने में कामयाब साबित हुई।

इस गाने से उनकी ऐसी धाक जमी कि फिर उन्‍होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आगे बढ़ते गये। इसके बाद उन्‍होंने 'टैक्सी ड्राइवर', 'गाईड', 'प्रेमपुजारी', 'मुनीम जी', 'फंटूश', 'नौ दो ग्यारह', 'पेइंग गेस्ट', 'ज्वेल थीफ़', 'तेरे मेरे सपने' जैसी फ़िल्मों में अपनी जादुई आवाज से लोगों को अपना दीवाना बना लिया दिया।

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आकाशवाणी पर हो गये थे बैन-:

एक से बढ़कर एक हिट गाने दिए लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उनके गानों को बैन कर दिया गया था। साल 1975 में जब इंदिरा गांधी सरकार ने आपात लगा दिया था जिसका शिकार किशोर कुमार भी हुए थे। आपातकाल के दौरान सरकार चाहती थी कि सरकारी योजनाओं की जानकारी किशोर कुमार अपनी आवाज में गाकर दें।

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जब किशोर कुमार से इस बारे में संपर्क किया गया। उन्‍हें संदेश भिजवाया गया कि इंदिरा गांधी के लिए गीत गायें ताकि जन-जन तक सरकारी आवाज पहुंच सके। लेकिन किशोर कुमार ने मना कर दिया। किशोर कुमार के गाने ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर बैन कर दिए। यह बैन 3 मई 1976 से लेकर आपातकाल खत्म होने तक जारी रहा।


मुंबई से दूर नहीं जा सके किशोर दा-:

एक समय ऐसा था, जब वो फिल्म के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर से बचने की भरसक कोशिश करते थे। लेकिन जैसा कहा जाता है कि वो बंबई को छोड़ना भले ही चाहें, लेकिन मायानगरी उन्हें कतई छोड़ना नहीं चाहती थी। छोड़ा भी नहीं। किशोर के पिता कुंजलाल गांगुली वकील और मां गौरी देवी धनाढ्य परिवार से ताल्लुक रखती थीं। किशोर चार भाइयों में सबसे छोटे थे। सबसे बड़े अशोक, उसके बाद सती देवी और फिर अनूप।

चार शादियां-:

उन्होंने चार बार शादी की. सिंगर रुमा घोष उनकी पहली पत्नी थीं। इसके बाद उन्होंने मधुबाला से शादी की। फिर योगिता बाली उनकी पत्नी बनीं और इसके बाद उन्होंने फिल्म एक्ट्रेस लीना चंदावरकर से ब्याह कर लिया।

अमिताभ बच्चन के लिए गाने से किया मना-:

एक समय ऐसा भी आया था, जब किशोर कुमार ने अमिताभ बच्चन के लिए गाने से इनकार कर दिया था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि अमिताभ ने किशोर के डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म 'ममता की छांव' में काम करने से मना कर दिया था। बाद में उन्होंने इस फिल्म में राजेश खन्ना को कास्ट किया। हालांकि ये फिल्म उनके निधन के बाद रिलीज हुई।

पैसे नहीं छोड़ते थे-:

किशोर कुमार के किस्सों में ये भी मशहूर है कि वो अपने पैसे नहीं छोड़ते थे। वह फिल्म तब साइन करते थे, जब उन्हें उनके नाम का चेक मिल जाता था। बेशक एडवांस में उन्हें फिल्ममेकर एक रुपया दे। फिल्म 'प्यार किए जा' में जब महमूद को किशोर कुमार से ज्यादा पैसे मिले, तो इसका बदला उन्होंने फिल्म पड़ोसन में उनसे दोगुने पैसे लेकर लिया।

किशोर दा के जीवन की कुछ दिलचस्प बातें-:

-: किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था।

-: अपने भाई बहनों में किशोर दा दूसरे नम्बर पर थे।

-: आभास कुमार गांगुली उर्फ किशोर कुमार का रुझान बचपन से ही पिता के पेशे वकालत की तरफ न होकर संगीत की ओर था। महान अभिनेता एवं गायक के.एल. सहगल के गानों से प्रभावित किशोर कुमार उनकी ही तरह के गायक बनना चाहते थे।

-: गायक के.एल. सहगल से मिलने की चाह लिए किशोर कुमार 18 वर्ष की उम्र मे मुंबई पहुंचे, लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पाई। उस समय तक उनके बड़े भाई अशोक कुमार बतौर अभिनेता अपनी पहचान बना चुके थे।

-: किशोर कुमार इन्दौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़े थे और उनकी आदत थी कॉलेज की कैंटीन से उधार लेकर खुद भी खाना और दोस्तों को भी खिलाना।

-: कैंटीन का मालिक जब उनको अपने पाँच रुपया बारह आना चुकाने को कहता तो वे कैंटीन में बैठकर ही टेबल पर गिलास और चम्मच बजा बजाकर पाँच रुपया बारह आना गा-गाकर कई धुन निकालते थे और कैंटीन वाले की बात अनसुनी कर देते थे। बाद में उन्होंने अपने एक गीत में इस पाँच रुपया बारह आना का बहुत ही खूबसूरती से इस्तेमाल किया।

-: किशोर दा ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा कभी किसी से नहीं ली थी। अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर नायक के रूप में अपनी पहचान बनाएं, लेकिन खुद किशोर कुमार को अदाकारी की बजाय पार्श्व गायक बनने की चाह थी।

-: बॉलीवुड में अशोक कुमार की पहचान के कारण किशोर कुमार को बतौर अभिनेता काम मिल रहा था।

-: किशोर कुमार की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म शिकारी (1946) से हुई। इस फ़िल्म में उनके बड़े भाईअशोक कुमार ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।

-: किशोर कुमार को पहली बार गाने का मौका मिला 1948 में बनी फ़िल्म जिद्दी में, जिसमें उन्होंने देव आनंद के लिए गाना गाया था। हालांकि फिल्म की सफलता के बावजूद उन्हें न तो पहचान मिली न कोई खास काम।

-: 1951 में फणी मजूमदार द्वारा निर्मित फ़िल्म 'आंदोलन' में किशोर कुमार ने हीरो के रूप में काम किया मगर फ़िल्म फ़्लॉप हो गई।

-: किशोर कुमार को अपने करिअर में वह दौर भी देखना पड़ा, जब उन्हें फिल्मों में काम ही नहीं मिलता था। तब वह स्टेज पर कार्यक्रम पेश करके अपना जीवन-यापन करने को मजबूर थे।

-: मुंबई में आयोजित एक ऐसे ही एक स्टेज कार्यक्रम के दौरान संगीतकार ओ.पी. नैय्यर ने जब उनका गाना सुना तो उन्होंने भावविह्लल होकर कहा कि महान प्रतिभाएं तो अक्सर जन्म लेती रहती हैं, लेकिन किशोर कुमार जैसा गायक हजार वर्ष में केवल एक ही बार जन्म लेता है। उनके इस कथन का उनके साथ बैठी गायिका आशा भोंसले ने भी सर्मथन किया।

किशोर दा के कुछ बेहतरीन नग्में-:

फिल्म 'इम्तिहान' का यह गाना 'रुक जाना नहीं तू कभी हार के...

'आ चल के तुझे, मैं ले के चलूं इक ऐसे गगन के तले'

फिल्म परिचय का गाना 'मुसाफिर हूं यारों, ना घर है ना ठिकाना मुझे चलते जाना है'


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