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ताकतवर संत जयेंद्र सरस्वती पूर्व पीएम वाजपेयी के थे खास, 10 प्वाइंट्स में जानिए पूरा प्रोफाइल

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 28 , 2018 , 12:57 IST

कांची कामकोटि पीठ के पीठाधिपति और 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का बुधवार को निधन हो गया। तमिलनाडु स्थित हिंदू धर्म में सबसे अहम और ताकतवर समझे जाने वाली कांची पीठ के पीठाधिपति के रूप में जयेंद्र सरस्वती ने राजनीतिक रूप से भी एक ताकतवर संत का जीवन जीया। दूसरी ओर जयेंद्र सरस्वती विवादों में भी घिरे और उनपर हत्या का आरोप तक लगा।

आइए 10 बिंदुओं में जानते हैं कि आखिर कौन थे जयेंद्र सरस्वती और कितना प्रभावशाली रहा उनका जीवन...

1- जयेंद्र सरस्वती का वास्तवकि नाम सुब्रमण्यन महादेव अय्यर था और उनका जन्म 18 जुलाई 1935 को हुआ था।

2- 68वें शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती ने सुब्रमण्यन को 22 मार्च 1954 को कांची मठ के पीठाधिपति के पद पर आसीन किया। उन्होंने ही इन्हें जयेंद्र सरस्वती का नाम दिया।

3- जयेंद्र सरस्वती को वेदों का ज्ञाता माना जाता था। भारत के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी भी इनके प्रशंसकों में से एक थे।

4- जयेंद्र सरस्वती ने अयोध्या विवाद के हल के लिए भी पहल की थी। इसके लिए वाजपेयी ने उनकी काफी प्रशंसा की। हालांकि तब जयेंद्र सरस्वती को आलोचना का भी शिकार होना पड़ा।

5- जयेंद्र सरस्वती ने हिंदुओं के प्रमुख केंद्र कांची कामकोटि मठ को और ताकतवर बनाया। उनके समय में इस केंद्र एनआरआई और राजनीतिक शख्सियतों की गतिविधियां बढ़ीं। कांची मठ कई स्कूल और अस्पताल भी चलाता है। देशभर में फेमस शंकर नेत्रालय मठ की तरफ से चलाया जाता है।

6- जयेंद्र सरस्वती ने 1983 में शंकर विजयेंद्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।

7- कांची मठ के मैनेजर शंकरारमन की हत्या के आरोप में 11 नवंबबर 2004 को जयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार भी किया गया था। उस समय जयललिता की ही सरकार थी। एक समय ऐसा था जब जयललिता जयेंद्र सरस्वती को अपना आध्यात्मिक गुरु मानती थीं।

8- बताते हैं कि जिस वक्त जयेंद्र सरस्वती को पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो वह 'त्रिकाल संध्या' कर रहे थे।

9- 27 नवंबर 2013 को शंकररमन मर्डर केस में पुडुचेरी की अदालत ने कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती, उनके भाई विजयेंद्र समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था।

10- शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती सेंथिल नारायणन के मुताबिक मृतक शंकररमन की पत्नी सुनवाई के दौरान आरोपियों को पहचानने में सफल नहीं रहीं थीं। इसके अलावा इस मामले के कई गवाह बाद में गवाही से मुकर गए।


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