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अलविदा हॉकिंग अंकल! आपसे ही जाना हमने अखिल ब्रह्मांड का रहस्य

icon सतीश कुमार वर्मा | 0
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| मार्च 14 , 2018 , 19:50 IST

तुम्हारी याद तो बहुत आएगी, स्टीफ़न चा। आख़िर तुम्हारे होने और समझाने से ही यह विराट ब्रह्मांड हमें डरावना नहीं,अपने घर जैसा जाना पहचाना और अपनेपन से भरा लगने लगा था। तुमने ही तो इस ब्रह्मांड के रहस्यमय कोने अंतरों से, उसके शायराना उसूलों से और उसकी अदेखी विमाओं से हमारा परिचय करवाया। तुमने हमें धरती से कान लगाकर सूक्ष्म कणों और सुदूर नक्षत्रों की धड़कन सुनना सिखाया।

आपने ही समझाया क्या होता है ब्लैक होल

तुमने हमें एक देश या एक ग्रह से ऊपर उठाकर अखिल ब्रह्मांड का नागरिक बनाया। इतना ही क्यों, दीगर ब्रह्मांडों की खोज के लिए भी उकसाया। यह भी समझाया कि एक ब्रह्मांड से दूसरे तक जाने का रास्ता आसमान की काली गुफाओं- ब्लैक होल- से होकर जाता है। और ऐसा भी नहीं कि ये काली गुफाएं हर चीज को निगल ही जाती हों।

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आपने ही समय का इतिहास समझाया

सबसे मज़ेदार था आपसे समय का इतिहास समझना। समय हमेशा से नहीं था। ब्रह्मांड के साथ ही उसका जन्म हुआ और इसी के साथ जाएगा। इस लिए न तो ब्रह्मांड के "पहले" जैसी कोई चीज नहीं होती, न उसे कोई बनाने वाला होता है। समय के सारे परमाणु उलट पलट कर तुमने यह घोषणा की कि ब्रह्मांड के निर्माण में किसी ईश्वर की कोई भूमिका नहीं हो सकती। इतने ठोस सबूतों के आधार पर कि ईश्वर भी उसे काट नहीं सका। मुझे लगता है, उसी दिन से वो तुम्हारी राह देख देख रहा था, तुम्हारे साथ शास्त्रार्थ करने के मूड में।

तुम वैज्ञानिक से भी बड़े मनुष्य थे। दुर्लभ और दारुण बीमारियों को अंगूठा दिखाते, मृत्यु से लड़ते, मनुष्य पर कालजयी चेतना का वरदान लुटाते। ब्रह्मांड को तो तुमने बदल दिया, अब हमें दुनिया बदलनी है, जिससे कि धरती का हर बाशिंदा तुम्हारे जैसी मुक्त चेतना का प्रकाश पा सके।

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अपने शुरुआती जीवन में दुर्लभ बीमारी को मात देनेवाले महान भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग का निधन हो गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब स्टीफन 21 साल के थे तभी, डॉक्टरों ने उन्हें कहा था कि वह सिर्फ दो साल और जीने वाले हैं। स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में दुनिया की मदद की। उनकी जिंदगी भी उनकी खोजों की तरह ही लोगों को हैरान कर देने वाली है।

आइए आपको बताते हैं हॉकिंग से जुड़ी कुछ खास बातें..

1974 में स्टीफन हॉकिंग ने दुनिया को अपनी सबसे महत्वपूर्ण खोज ब्लैक होल थिअरी के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि ब्लैक होल क्वॉन्टम प्रभावों की वजह गर्मी फैलाते हैं। पांच साल बाद ही वह कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में गणित के प्रफेसर बन गए। यह वही पद था जिस पर कभी महान वैज्ञानिक ऐलबर्ट आइनस्टाइन नियुक्त थे।

amyotrophic lateral sclerosis नामक रहस्यमयी बीमारी से थे ग्रसित

हॉकिंग को 21 साल की उम्र में amyotrophic lateral sclerosis (ALS) नामक गंभीर बीमारी हो गई थी। इस बीमारी की वजह से ही उनके शरीर ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था। हॉकिंग जब ऑक्सफर्ड में फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहे थे तभी उन्हें सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाइयों का समाना करना पड़ा। धीरे-धीरे यह समस्याएं इतनी बढ़ गईं कि उनकी बोली लड़खड़ाने लगी। डॉक्टर्स ने उस समय हॉकिंग को बताया था कि वह 2 साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगे लेकिन यह दावा गलत साबित कर हॉकिंग ने अपनी रिसर्च जारी रखी।

हॉकिंग चल फिर नहीं सकते थे और हमेशा वील चेयर पर रहते थे। वह कम्प्यूटर और तमाम डिवाइसों के जरिए अपने शब्दों को व्यक्त करते थे। उन्होंने इसी तरह से भौतिकी के बहुत से सफल प्रयोग भी किए हैं।

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स्वर्ग की परिकल्पना को सिरे से किया खारिज

स्टीफन हॉकिंग ने स्वर्ग की परिकल्पना को सिरे से खारिज करते हुए इसे अंधेरे से डरने वाली कहानी बताया था। हॉकिंग ने कहा था कि हमारा दिमाग एक कम्प्यूटर की तरह है जब इसके पुर्जे खराब हो जाएंगे तो यह काम करना बंद कर देगा। खराब हो चुके कम्प्यूटरों के लिए स्वर्ग और उसके बाद का जीवन नहीं है। स्वर्ग केवल अंधेरे से डरने वालों के लिए बनाई गई कहानी है। साल 1998 में प्रकाशित हुई स्टीफन हॉकिंग की किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्ररी ऑफ टाइम' ने पूरी दुनिया में तहलका मचाया था। इस किताब में उन्होंने ब्रह्मांड विज्ञान के मुश्किल विषयों जैसे 'बिग बैंग थिअरी' और ब्लैक होल को इतने सरल तरीके से बताया कि एक साधारण पाठक भी उसे आसानी से समझ जाए। इस किताब की लाखों प्रतियां हाथों-हाथ बिक गई। हालांकि, स्टीफन हॉकिंग को किताब के लिए विरोध का भी सामना करना पड़ा था क्योंकि उन्होंने इस किताब में ईश्वर के अस्तित्व को नकारा था।

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तो धरती बन जाएगी आग का गोला

बीते साल ही स्टीफन हॉकिंग ने यह चेतावनी दी थी कि धरती पर जिस तेजी से आबादी और ऊर्जी की खपत बढ़ रही है, उस तरह से 600 सालों से भी कम समय में यह धरती आग का गोला बन जाएगी। स्टीफन हॉकिंग के पीएचडी शोधपत्र को सार्वजनिक करने के कुछ ही दिनों में इसे दुनियाभर के 20 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा था। 1966 में किया गया शोध इतना लोकप्रिय हुआ कि इसे जारी करते ही कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की वेबसाइट ठप हो गई थी।

हॉकिंग बनाना चाहते थे टाइम मशीन

हॉकिंग एक टाइम मशीन बनाना चाहते थे। उन्होंने एक बार कहा था कि अगर उनके पास टाइम मशीन होती तो वह हॉलिवुड की सबसे खूबसूरत अदाकारा मानी जाने वाली मर्लिन मुनरो से मिलने जाते।
1974 में हॉकिंग ने भाषा की छात्रा जेन विल्डे से शादी की थी। हालांकि, दोनों के तीन बच्चे होने के बाद 1999 में तलाक हो गया। इसके बाद हॉकिंग ने दूसरी शादी की।

साभार: आशुतोष फेसबुक वाल 

 

 

 

 


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सतीश कुमार वर्मा

लेखक न्यूज वर्ल्ड इंडिया में वेब जर्नलिस्ट हैं

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