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राफेल: किसकी डील कितनी सस्ती, कैग की रिपोर्ट से जाने कुछ महत्वपूर्ण बिंदू...

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 13 , 2019 , 14:55 IST

एक तरफ राफेल पर सियासी घमासान मचा हुआ है कांग्रेस अध्यक्षराहुल गांधी राफेल डील को घोटाला बता रहे हैं तो दूसरी तरफ मोदी सरकार राफेल पर राजनीति करने का आरोप कांग्रेस पर लगाती दिख रही है...वहीं इन आरोपों प्रत्यारोपों के दौरान आज राज्यसभा में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट संसद में पेश की गई है...

जिसमें राफेल के कीमतों का जिक्र नहीं किया गया है लेकिन यह जरूर बताया गया है कि सौदा पहले की तुलना में सस्ता है लेकिन उतना भी सस्ता नहीं है जितना मोदी सरकार द्वारा बताया जा रहा है। रिपोर्ट में मोदी सरकार के उस दावे को भी खारिज कर दिया गया है जिसमें कहा जा रहा था कि राफेल विमान पिछली डील से 9 फीसदी सस्ती है।

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आइए यहां जानते हैं राज्यसभा में पेश हुई CAG रिपोर्ट की बड़ी मुख्य बातें क्या हैं-

1-: NDA सरकार की राफेल डील पिछली सरकार से 2.86 फीसदी सस्ती-:

कैग की 141 पेज की रिपोर्ट को संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में पेश किया गया। रिपोर्ट में कैग ने तुलनात्मक विश्लेषण किया है। कैग ने रक्षा मंत्रालय के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि 2016 में 36 राफेल विमानों की डील 2007 के प्रस्ताव की तुलना में 9 प्रतिशत कम थी।

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2-: फ्लाई अवे प्राइस (तैयार विमान) का दाम यूपीए सरकार की डील के बराबर-:

कैग रिपोर्ट में 2007 के टेंडर और 2016 के अनुबंध को तालिका में दर्शाया गया है और यह पहले प्रस्ताव की तुलना में सस्ता है। कैग के अनुसार 2007 के पिछले प्रस्ताव में दसॉ एविएशन ने परफॉर्मेंस ऐंड फाइनेंशियल वॉरंटी की बात कही थी। जो कुल अनुबंध की 25 फीसदी राशि थी।

4-: CAG रिपोर्ट में राफेल विमान के दाम को नहीं बताया गया है।

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5-: भारतीय वायु सेना ने एयर स्टाफ क्ववांटिटीव रिक्वायरमेंट (ASQRs) को सही तरीके से नहीं बताया जिसके कारण कोई भी वेंडर ASQR पर खरा नहीं उतर पाया था।

6-: खरीद प्रक्रिया के दौरान ASQRs को जल्दी-जल्दी बदला गया, जिसके कारण तकनीक और प्राइस आकलन के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा एवं प्रतिस्पर्धात्मक टेंडरिंग पर असर पड़ा।

7-: राफेल खरीद में देरी के पीछे एक अहम कारण यह भी रहा।

8-: पहले 18 राफेल लड़ाकू विमानों का डिलीवरी शेड्यूल 126 राफेल विमानों की तुलना में बेहतर था।

9-: रक्षा मंत्रालय की टीम ने मार्च 2015 में 126 राफेल डील को रद्द करने की अनुशंसा की थी। टीम ने कहा था कि दसॉ एविएशन ने सबसे कम बोली नहीं लगाई है और यूरोपियन एयरोनॉटिक्स डिफेंस ऐंड स्पेस कंपनी इस टेंडर के लिए योग्य ही नहीं है।


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