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पूरे देश में हो रही है रोती पोती-दादी की चर्चा, क्या है इस फोटो का सच, जानिये

अमितेष युवराज सिंह | न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 9
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| अगस्त 22 , 2018 , 20:42 IST

इन दिनों सोशल मीडिया में दादी-पोती की एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है। ये तस्वीर भावुक कर देने वाली है। इस तस्वीर में बच्ची स्कूल ड्रेस में है और वह एक बुजुर्ग महिला के साथ बैठकर रो रही है। लोग खूब इस फोटो को शेयर कर रहे हैं। फोटो को शेयर करते हुए लोग कह रहे हैं फोटो में दादी और पोती है जिनकी मुलाकात एक वृद्धाश्रम में होती है। वृद्धाश्रम में अपनी दादी को देखकर बच्ची रोने लगती है। इस फोटो को हजारों लोगों ने शेयर किया है। क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी इसे अपने अकाउंट में शेयर किया है।

आखिर ये बच्ची कौन है और क्या है इस तस्वीर की असली कहानी। दरअसल, ये तस्वीर आज की नहीं है। ये तस्वीर करीब 11 साल पुरानी वर्ष 2007 की है। ये फोटो अहमदाबाद के फोटो जर्नलिस्ट कल्पित भचेच की है। उन्होंने साल 2007 में 12 सितंबर को ये तस्वीर ली थी। उस वक्त कल्पित एक गुजराती अखबार में काम करते थे।

इसकी कहानी कुछ यूं है। 12 सितंबर 2007 को मणिनगर का जीएनसी स्कूल अपने बच्चों को लेकर एक वृद्धाश्रम में गया था। वृद्धाश्रम में जब बच्चों और बुजुर्गों की मुलाकात हो रही थी उसी समय एक बच्ची एक बुजुर्ग महिला को देखकर रोने लगी। जब स्कूल की प्रिंसिपल रीटा पांड्या और फोटोग्राफर कल्पित ने बच्ची से पूछा कि तुम क्यों रो रही हो तो बच्ची ने बताया कि वह महिला मेरी बा (दादी) हैं।

Kalpit

(फोटो सौजन्य- कल्पित भचेच)

अपनी पोती को देखकर दादी भी रोने लगी थी। लंबे समय से दादी से जुदा बच्‍ची ने जैसे ही वृद्धाश्रम में उन्‍हें देखा, वह उनके सीने से लिपटकर रोने लगी। दादी-पोती का प्‍यार देख वहां मौजूद बाकी बच्‍चे भी भावुक हो गए। इस दृश्य को फोटोग्राफर कल्पित ने अपने कैमरे में कैद कर लिया।

आपको बता दें कि बच्ची जब कभी घर में माता-पिता से दादी के बारे में पूछती, वह उसे यह कहकर शांत करवा देते थे कि दादी अपने किसी रिश्तेदार के पास रहने के लिए चली गईं हैं। जबकि रिश्‍तों की अहमियत को दागदार करने वाले बेटे-बहू ने उन्‍हें वृद्धाश्रम में छोड़ दिया था। फेसबुक पर मणिभद्रा नाम के एक यूजर ने इस फोटो के जरिए कहानी का खुलासा किया।

Granddaughter

आपको बता दें कि बुजुर्ग दादी का नाम दमयंती है उनकी पोती का नाम भक्ति है। दोनों अहमदाबाद में रहते हैं। 11 साल पुरानी इस तस्वीर ने रिश्तों की अहमियत को उजागर कर दिया है। कैसे लोग शहरीकरण और न्यूक्लियर फैमिली की वजह से अपने मां-बाप और रिश्तेदारों से दूर होते जा रहे हैं।


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