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कुंभ 2019: आस्था की डुबकी के साथ हुआ कुंभ का आगाज, संतों-श्रद्धालुओं ने किया पहला शाही स्नान

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| जनवरी 15 , 2019 , 09:09 IST

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आस्था के सबसे बड़े मेले कुंभ 2019 का आगाज हो गया है। मकर संक्रांति के मौके पर हिन्दू धर्म के साधु-संन्यासी पहले शाही स्नान के लिए पहुंचे। प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों के संगम स्थल पर नागा साधुओं और फिर अन्य अखाड़ों के साधु व संतों के शाही स्नान के बाद श्रद्धालुओं का संगम तट पर डुबकी लगाने का सिलसिला जारी है। 15 जनवरी यानि मकर संक्रांति से प्रयाग की धरती पर धर्म के विश्वविद्यालय के आरंभ का उद्घोष हो गया है। ऐसा माना जाता है कि संगम में डुबकी लगाने से इंसान के सारे पाप धुल जाते हैं और लोगों को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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कड़ाके की ठंड में हुआ शाही स्नान

मकर संक्रांति के मौके पर शाही स्नान के साथ ही प्रयागराज में कुंभ का आगाज हो गया है। कड़ाके की ठंड में अलग-अलग अखाड़ों के साधु ने गंगा में डुबकी लगाई। हर तपस्वी की यही इच्छा होती है कि वो धर्म के सबसे बड़े मेले में संगम तट पर शाही स्नान का हिस्सा बनें। उनके लिए कुंभ ही उनके जीवन का सबसे बड़ा तीर्थ है। ऐसे में सालों बाद जब ये मौका आया तो कड़ाके की ठंड को भी मात देते हुए संन्यासियों ने शाही स्नान किया।

मंगलवार को सुबह 5 बजे से शुरू स्नान पूरे दिन जारी रहेगा। सुबह सबसे पहले महानिर्वाणी के साधु-संत पूरे लाव-लश्कर के साथ शाही स्नान को संगम तट पर पहुंचे। इसके साथ ही अखाड़ों के स्नान का क्रम प्रारंभ हुआ। सभी अखाड़ों को बारी-बारी से स्नान के लिए 30 मिनट से 45 मिनट तक का समय दिया गया है।

साधु-संतों के साथ आम श्रद्धालु भी संगम सहित अलग-अलग घाटों पर आधी रात से स्नान कर रहे हैं। वहीं यहां पर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। कड़ी सुरक्षा के बीच घाटों पर नहाने और पूजा पाठ का सिलसिला जारी है।

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12 करोड़ लोगों के आने का अनुमान

इस बार कुंभ में 12 करोड़ लोगों के आने का अनुमान जताया जा रहा है, ऐसे में करोड़ों लोगों की सुविधा और सुरक्षा का ख्याल रखते हुए ज़बरदस्त इंतजाम किए गए हैं। इनमें संगम तट पर बना अस्थाई अस्पताल लाजवाब है, इसमें 100 बेड लगाए गए हैं, वो बेहद आधुनिक हैं, अब तक इस अस्पताल में 10 हज़ार लोगों को ओपीडी के ज़रिए इलाज किया जा चुका है। इस बार कुंभ में नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से पहली बार कुंभ मेले के लिए इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर बनाया गया है। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने इस कमांड सेंटर का उद्घाटन किया था। कुंभ में 40 हज़ार एलईडी लाइट लगाई गई हैं, तो लेज़र शो के ज़रिए सांस्कृतिक कार्यक्रम दिखाए जाएंगे।

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कुंभ का इतिहास

कुंभ का आयोजन कब से आरंभ हुआ, इस विषय में सुनिश्चित रूप से हमें कोई विशेष प्राचीन शास्त्रीय संदर्भ प्राप्त नहीं होता है। लेकिन एक पौराणिक संदर्भ अवश्य मिलता है, जिसमें ग्रहों की विशेष स्थिति होने पर ही कुंभ होने की ओर संकेत मिलता है। स्कन्द पुराण में उल्लेख आता है कि –

चन्द्रः प्रश्रवणाद्रक्षां, सूर्यो विस्फोटनाद्दधौ।

दैत्येभ्यश्च गुरु रक्षां, सौरिंर्देवेन्द्रजाद् भयात्।।

सूर्येन्दुगुरूसंयोगस्य, यद्राशौ यत्र वत्सरे।

सुधाकुम्भप्लवे भूमौ, कुम्भो भवति नान्यथा।।

अर्थात् जिस समय अमृतपूर्ण कुंभ को लेकर देवताओं और दैत्यों में संघर्ष हुआ उस समय चंद्रमा ने उस अमृत कुंभ से अमृत के छलकने की रक्षा की और सूर्य ने उस अमृत कुंभ के टूटने से रक्षा की। देवगुरु बृहस्पति ने दैत्यों से रक्षा की और शनि ने इंद्रपुत्र जयंत के हाथों से इसे गिरने नहीं दिया। इसलिए देवताओं और राक्षसों की लड़ाई के दौरान जिन-जिन जगहों पर (हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन, नासिक) और जिस-जिस दिन सुधा का कुंभ छलका, उन्हीं-उन्हीं स्थलों में उन्हीं तिथियों में कुंभपर्व का आयोजन होता है।

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