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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनाम 4 जज: ये है विवाद की वजह, सामने आई जजों की चिट्ठी

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 12 , 2018 , 14:14 IST

आजाद भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने शुक्रवार को मीडिया के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चारों जजों ने एक चिट्ठी जारी की, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित 7 पन्नों के पत्र में जजों ने कुछ मामलों के असाइनमेंट को लेकर नाराजगी जताई है। जजों का आरोप है कि चीफ जस्टिस की ओर से कुछ मामलों को चुनिंदा बेंचों और जजों को ही दिया जा रहा है।

पढ़ें, चिट्ठी में जजों ने क्या लिखा है...

'हम बेहद कष्ट के साथ आपके समक्ष यह मुद्दा उठाना चाहते हैं कि अदालत की ओर से दिए गए कुछ फैसलों से न्यायपालिका की पूरी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके अलावा उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के कामकाज पर भी असर पड़ा है।

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SC के जजों ने प्रेस से बात कर मचाई हलचल, 'सब ठीक नहीं'

अगले पैरे में जजों ने लिखा, 'स्थापना के समय से ही कोलकाता, बॉम्बे और मद्रास हाई कोर्ट में प्रशासन के नियम और परंपरा तय थे। इन अदालतों के कामकाज पर इस अदालत के फैसलों ने विपरीत प्रभाव डाला है, जबकि सुप्रीम कोर्ट की स्थापना तो खुद इन उच्च न्यायालयों के एक सदी के बाद हुई थी।

पत्र में कहा गया, 'सामान्य सिद्धांत है कि चीफ जस्टिस के पास रोस्टर तैयार करने का अधिकार होता है और वह तय करते हैं कि कौन सी बेंच और जज किस मामले की सुनवाई करेगी। हालांकि यह देश का न्यायशास्त्र है कि चीफ जस्टिस सभी बराबर के जजों में प्रथम होता है, न ही वह किसी से बड़ा और न ही छोटा होता है।'

जजों ने अपने पत्र में लिखा, 'ऐसे भी कई मामले हैं, जिनका देश के लिए खासा महत्व है। लेकिन, चीफ जस्टिस ने उन मामलों को तार्किक आधार पर देने की बजाय अपनी पसंद वाली बेंचों को सौंप दिया। इसे किसी भी कीमत पर रोका जाना चाहिए।'

किन मामलों पर है विवाद नहीं किया इसका खुलासा

पत्र में यह भी लिखा गया है कि यह संस्थान की प्रतिष्ठा को हानि न पहुंचे, इसलिए मामलों का जिक्र नहीं कर रहे हैं, लेकिन इसकी वजह से पहले ही न्यायपालिका की संस्था की छवि को नुकसान हो चुका है।

जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हंगामा, किसने क्या कहा?

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद से तमाम धड़ों से प्रतिक्रिया का दौर शुरू हो गया है। 

इस मुद्दे पर बोलते हुए बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा, “ये चारों जज ईमानदार जज हैं, अगर ये चारों कोई बात कह रहे हैं तो वो सुनी जानी चाहिए। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसका संज्ञान लेना चाहिए। ”

इस मुद्दे पर बोलते हुए जस्टिस आर एस सोढ़ी ने कहा, “मुझे लगता है कि इन चारों जजों को अब वहां बैठने का अधिकार नहीं है। लोकतंत्र खतरे में है तो संसद है, पुलिस प्राशासन है। यह उनका काम नहीं है।

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