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रमजान में वोटिंग पर छिड़ा सियासी घमासान, TMC और AAP ने उठाए सवाल

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 11 , 2019 , 13:06 IST

2019 लोकसभा चुनाव की तारिख के ऐलान के साथ ही सियासी संग्राम छिड़ गया है। कुछ विपक्षी पार्टियां चुनाव के तारिख को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पवित्र माह रमजान के दौरान वोटिंग पर भी सियासी बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। इसकी अहम वजह कुल 543 में से 169 लोकसभा सीटों पर रमजान के दौरान वोटिंग होना भी है। खासकर यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली की अधिकतर सीटों पर आखिरी तीन चरणो में ही मतदान होना है।

बता दें कि 10 मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने चुनाव के तारिख की घोषणा की। इस बात लोकसभा चुनाव के लिए मतदान 7 चरणो में किया जाएगा। 11 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग होगी इसके बाद 18 अप्रैल, 23 अप्रैल, 29 अप्रैल, 6 मई, 12 मई और 19 मई को बाकी चरणों की वोटिंग होने वाली है पर रमजान के पर्व पर मतदान को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।

इस साल रमजान 5 मई से शुरू हो रहा है। यानी 6, 12 और 19 मई को होने वाली आखिरी तीन चरणों की वोटिंग रमजान के दौरान होगी। इसको लेकर कई राजनीतिक पार्टियों ने आपत्ति जताई है। जैसा सब जानते हैं कि रमजान के दौरान मुस्लिम समाज के लोग सुबह से शाम तक बिना कुछ खाए-पिए रोजा रखते हैं, ऐसे में ये सवाल उठाए जाने लगे हैं कि रोजे और भीषण गर्मी के दौरान मुस्लिम मतदाता घंटों तक लाइन में लगकर कैसे वोट डाल पाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो इन राज्यों के मुस्लिम बहुल इलाकों में वोटिंग का प्रतिशत कम रह सकता है और अगर वोटिंग का गणित ऐसा रहा तो स्थानीय तौर पर मुस्लिम मतदाता जिन पार्टियों को भी वोट देते हैं, उनकी विरोधी पार्टी के उम्मीदवारों को इसका फायदा मिल सकता है।

इस्लामिक स्कॉलर ने उठाए सवाल

रमजान पर चुनाव की तारिख को लेकर इस्लामिक स्कॉलर और लखनऊ ईदगाह के इमाम व शहरकाजी मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने 6 मई से 19 मई के बीच होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर ऐतजराज जताया है। उन्होंने कहा है कि 5 मई को मुसलमानों के सबसे पवित्र महीने रमजान का चांद देखा जाएगा। अगर चांद दिख जाता है तो 6 मई से रोजे शुरू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि रोजे के दौरान देश में 6 मई, 12 मई व 19 मई को मतदान होगा, जिससे देश के करोड़ों रोजेदारों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, चुनाव की घोषणा करते हुए सीईसी सुनील अरोड़ा ने कहा था कि पर्व-त्योहारों का ध्यान रखते हुए तारीख तय की गई हैं।

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी ने ये भी कहा कि चुनाव आयोग को देश के मुसलमानों का ख्याल रखते हुए चुनाव कार्यक्रम तय करना चाहिए था। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह 6, 12 और 19 मई को होने वाले मतदान की तारिख बदलने पर विचार करे।

TMC नेता ने जताया ऐतराज

कोलकाता के मेयर और टीएमसी नेता फरहाद हकीम ने कहा कि बिहार, यूपी और बंगाल में सात चरण में चुनाव होने हैं और इन तीनों राज्यों में अल्पसंख्यक आबादी काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि रोजे के दौरान वोटिंग करनी होगी, चुनाव आयोग को इसका ध्यान रखना चाहिए था। फरहाद हकीम ने ये भी आरोप लगाया कि बीजेपी नहीं चाहती कि अल्पसंख्यक अपना वोट करें।

AAP विधायक ने भी उठाए सवाल

मुस्लिम धर्मगुरु और TMC नेता के अलावा AAP नेता ने भी चुनाव की तारिखों को लेकर सवाल खड़े किए है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के ओखला विधानसभा सीट से विधायक अमानतुल्लाह खान ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलने वाला है। अमानतुल्लाह ने इस संबंध में ट्वीट करते हुए लिखा, '12 मई का दिन होगा दिल्ली में रमजान होगा मुसलमान वोट कम करेगा इसका सीधा फायदा बीजेपी को


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