ख़ास रिपोर्ट

जिनकी तलवार की छनक से अकबर का दिल घबराता था, ऐसे महान थे महाराणा | 10 बातें

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
2206
| मई 9 , 2018 , 14:31 IST

सोलहवीं शताब्दी के राजपूत शासकों में महाराणा प्रताप ऐसे शासक थे, जो अकबर को लगातार टक्कर देते रहे। महाराणा प्रताप अपने बचपन में प्रताप सिंह के नाम से जाने जाते थे। 9 मई को मेवाड़ नरेश राणा उदय सिंह के घर जन्‍मे प्रताप बचपन से ही काफी प्रतापी रहे।

अपने पिता की कई संतानों की ही तरह प्रताप ने भी युद्धकला की शिक्षा ली थी, लेकिन उनसभी में सिर्फ वो ही राजा बनने के लायक साबित हुए, क्‍योंकि उनमें कई ऐसे गुण थे जो उन्‍हें आगे लेकर गए।

Aaa

आइए जानते हैं उनसे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

1.हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया था। अकबर और राणा के बीच यह युद्ध महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी सिद्ध हुआ था।

2.ऐसा माना जाता है कि हल्दीघाटी के युद्ध में न तो अकबर जीत सका और न ही राणा हारे। मुगलों के पास सैन्य शक्ति अधिक थी तो राणा प्रताप के पास जुझारू शक्ति की कोई कमी नहीं थी।

3.महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था। उनके भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था।

हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप को विजेता घोषित करने की तैयारी

4. आपको बता दें हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 20000 सैनिक थे और अकबर के पास 85000 सैनिक, इसके बावजूद महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे।

5. कहते हैं कि अकबर ने महाराणा प्रताप को समझाने के लिए 6 शान्ति दूतों को भेजा था, जिससे युद्ध को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म किया जा सके, लेकिन महाराणा प्रताप ने यह कहते हुए हर बार उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया कि राजपूत योद्धा यह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता।

6. महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कुल 11 शादियां की थीं। कहा जाता है कि उन्होंने ये सभी शादियां राजनैतिक कारणों से की थीं।

7. महाराणा प्रताप को बचपन में कीका के नाम से पुकारा जाता था।

8. महाराणा प्रताप का सबसे प्रिय घोड़ा चेतक था। महाराणा प्रताप की तरह ही उनका घोड़ा चेतक भी काफी बहादुर था।

9. बताया जाता है जब युद्ध के दौरान मुगल सेना उनके पीछे पड़ी थी तो चेतक ने महाराणा प्रताप को अपनी पीठ पर बैठाकर कई फीट लंबे नाले को पार किया था। आज भी चित्तौड़ की हल्दी घाटी में चेतक की समाधि बनी हुई है।

10. हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से लडने वाले सिर्फ एक मुस्लिम सरदार था -हकीम खां सूरी।


कमेंट करें