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महाशिवरात्रि ऐसे करें महादेव और पार्वती जी का पूजन..पूरी होगी हर मुराद

आशुतोष कुमार राय, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 4 , 2019 , 11:08 IST

वैसे तो हर महीने शिवरात्रि होती है..लेकिन फाल्गुन महीने की शिवरात्रि का सबसे अधिक महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। वैदिक मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ और मां पार्वती का विवाह होता है। इसलिए इस दिन व्रत..पूजन के साथ साथ रात्रि जागरण का विशेष मह्त्व माना गया है।

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भोलेनाथ को तो देवों का देव कहा जाता है। सबसे जल्द प्रसन्न वाले भगवान आशुतोष इस दिन तो केवल एक बेल पत्र..एक लोटा जट चढ़ाऩे से ही भक्तों की हर मनोकामना पूरी कर देते हैं। ध्यान रहे इस दिन भोलेनाथ के साथ साथ मां पार्वती का..शिव परिवार का ध्यान पूजन जरूर करें।

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इस बार महाशिवरात्रि 4 मार्च को है। इस दिन सोमवार और श्रवण नक्षत्र होने से कई उत्तम योग..संयोग बन रहा है। ऐसे में दिन व्रत जरूर रहें। जो जातक व्रत न रह सके..वो सुबह जल्द स्नान कर...शिव परिवार को जल..गंगा जल से स्नान कराएं। और फिर पंचोपचार..षोडशोपचार विधि से पूजन करें। और फिर शाम को भगवान आशुतोष..मां पार्वती की आरती करें। और फिर शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करें।

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नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे “न” काराय नमः शिवायः॥
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे “म” काराय नमः शिवायः॥

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महाशिवरात्रि के दिन पूरी रात्रि अखंड दीपक जलाने से जहां घर से वास्तु दोष दूर होता है..वहीं घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।

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यही नहीं महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ का रुद्राभिषेक...दुग्धाभिषेक..सहस्त्रार्चन करना विशेष फलदायी होता है। जिन भक्तों के लिए यह संभव न हो सके..वो केवल 11..21 बेलपत्र...या फिर कमल फूल..भांग..धतुरा..कनेर का फूल चढ़ांए..और सच्चे मन से अवघरदानी को प्रणाम करें। उनके अपनी मनोकामना कहें।

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आशुतोष शशांक शेखर चन्द्र मौली चिदंबरा।
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू कोटि नमन दिगम्बरा।।


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