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आज है महाशिवरात्रि, जानिए कैसे करें भगवान शिव की पूजा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 4 , 2019 , 08:59 IST

आज महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव की पूजा की जाती है।  महाशिवरात्रि भगवान शिव का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की आराधना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और व्यक्ति को सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। इस दिन को 'शिव की महान रात्रि' के रूप में भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि महाशिरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने धरती को नष्ट होने से बचाया था। कई ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि इसी दिन रात्रि में शिव जी का विवाह भी हुआ था। इसलिए दुनियाभर में महाशिवरात्रि की पूरी रात चार प्रहर की पूजा की जाती है।

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जानिए व्रत क्यों है महत्वपूर्ण

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महाशिवरात्रि के पावन अवसर के दिन सभी नर-नारी व्रत रखते हैं। कहा जाता है कि भोलनाथ जैसे वर की चाह में कुंवारी कन्याएं व्रत रखती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से उन्हे बहुत अच्छा वर मिलता है। वहीं सुहागिन स्त्रियां भी शिवरात्रि के दिन व्रत रखती हैं। ऐसा करने से उनके पति का जीवन और हमेशा अच्छा बना रहता है।

जानिए कैसे करें भगवान शिव की पूजा

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भगवान शिव को महाशिवरात्रि पर रोली, मौली, साबुत चावल, लौंग, इलायची, सुपारी, जायफल, हल्दी, केसर, पंचमेवा, मौसमी फल, नागकेसर जनेऊ, कमलगट्टा, सप्तधान्य, सफेद मिठाई, नारियल, कुशा, अबीर, चन्दन, गुलाब, इत्र, पंचामृत, कच्चा दूध, बेलपत्र, बेल का फल, गुलाब के फूल, आक धतूरा, भांग, धूप दीप आदि अर्पण करें। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

महाशिवरात्रि के दिन ना करें ये काम:

महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन देर तक सोने वाले लोगों से शिव जी नाराज हो जाते हैं। साथ ही बिना नहाएं इस दिन कुछ भी ना खाएं।

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शिवरात्रि के दिन काले रंग के कपड़ों को पहनना अशुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें।

भगवान शिव को भूलकर भी चंपा और केतकी के फूल नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव ने इन फूलों को शापित किया था।

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भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाए जाने चाहिए। अक्षत का मतलब होता है अटूट चावल, यह पूर्णता का प्रतीक है। इसल‌िए श‌िव जी को अक्षत चढ़ाते समय यह देख लें क‌ि चावल टूटे हुए ना हों।

शिवलिंग पर अभिषेक हमेशा ऐसे पात्र से करना चाहिए जो सोना, चांदी या कांसे का बना हो। अभिषेक के लिए कभी भी स्टील, प्लास्टिक के बर्तनों का प्रयोग ना करें।

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