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दही,चुड़ा और गुड़ का त्यौहार मकर संक्रांति आज, देश भर में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 14 , 2018 , 09:16 IST

देश के विभिन्न हिस्सों में मकर संक्राति पर्व आज धूमधाम से मनाया जा रहा है। भारत के अलग-अलग हिस्सों के अलावा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से करीब 20 लाख श्रद्धालु आज मकर संक्राति के मौके पर बंगाल की खाड़ी स्थित गंगा नदी के संगम में पुण्य स्नान के लिए एकत्रित हो चुके हैं।

बिहार में चूड़ा-दही और तिलवा-लाई तथा उत्तर प्रदेश खिचड़ी के नाम से लोकप्रिय यह पर्व अधिकांश लोगों द्वारा पूरी श्रद्धा, विश्वास और उमंग से आज ही मनाया जा रहा है। श्रद्धालुजन नदियों और सरोवरों में डुबकियां लगा रहे हैं।

मकर संक्रांति से पहले शुरू होने वाला गंगासागर का मेला नौ जनवरी से चल रहा है, जो आज खत्म हो जाएगा। पश्चिम बंगाल के 24 दक्षिण परगना के जिलाधिकारी वाई रत्नाकर राव ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि पिछले साल करीब 15 लाख श्रद्धालु गंगासागर आए थे। इस वर्ष यह आंकड़ा काफी ज्यादा है। अभी तक करीब 20 लाख लोग यहां पर पहुंच चुके हैं। हमने इनके लिए सभी इंतजाम किए हैं, ताकि इनकी यहां की यात्रा यादगार रहे।

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इस प्रसिद्ध तीर्थस्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यहां पर राज्य सरकार ने करीब तीन हजार पुलिस कर्मियों की तैनाती की है और रविवार को पुण्य स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर नजर रखने के लिए सात ड्रोन सेवा में लगाए हैं।

असल में पहली बार राज्य सरकार ने गंगासागर मेले में निर्बाध संचार सुनिश्चित करने के लिए अपने अधिकारियों को सैटेलाइट फोन से लैस किया है।

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हिन्दू मान्यता के मुताबिक साल की 12 संक्रांत‌ियों में मकर संक्रांत‌ि का सबसे महत्व ज्यादा है। इस द‌िन सूर्य मकर राश‌ि में आते हैं और इसके साथ देवताओं का द‌िन शुरु हो जाता है, जो देवशयनी एकादशी से सुप्त हो जाते हैं।

मकर संक्रांति को तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, असम में बिहू और पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

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पर्व और त्योहारों की तिथियां चंद्र पंचांग यानी चंद्रमा की गति और उसकी कलाओं पर आधारित हैं। इस पंचांग में तिथि वृद्धि और तिथि क्षय होने के कारण पर्वों और त्योहारों, जैसे- महाशिवरात्रि, होली, जन्माष्टमी, नवरात्र, दीपावाली आदि की तिथियां अंग्रेजी कैलेण्डर की तिथियों से मेल नहीं खाती हैं। मकर संक्रांति पर्व प्राय: इसका अपवाद रहा है।

यह पर्व प्राय: हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता रहा है, क्योंकि भारतीय पर्वों में मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जिसका निर्धारण सूर्य की गति के अनुसार होता है।

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पंचांग के अनुसार वर्ष 2016 में मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से सायंकाल 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। पुण्यकाल के स्थानांतरण के कारण ही वर्ष 2016 में मकर संक्रांति का महत्व 15 जनवरी को भी है।

यही कारण है कि इस वर्ष यह पर्व दोनों दिन यानी 14 और 15 जनवरी को मनाया गया।

उल्लेखनीय है कि मकर संक्राति को देश के भिन्न-भिन्न स्थानों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल में जहां यह केवल संक्रांति कहलाता है, वहीं बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह खिचड़ी पर्व के रुप में लोकप्रिय है। तमिलनाडु में इसे पोंगल के रुप में मनाया जाता है, जबकि अनेक स्थानों पर इसे उत्तरायण पर्व भी कहा जाता है।


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