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मालदीव ने चीन की मदद से बनाया ब्रिज, गुस्साये भारत ने कार्यक्रम का किया बहिष्कार

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| सितंबर 2 , 2018 , 19:27 IST

मालदीव में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा को फ्लाइओवर के उद्धाटन समारोह में नहीं पहुंचने से मालदीव सरकार ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि हमने भारत के राजदूत को बुलाया, लेकिन वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।

हालांकि भारत की ओर से इसपर खबर लिखने तक कोई बयान नहीं आया है। इस फ्लाइओवर का उद्धाटन चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मौजूदगी में किया गया। मालदीव पर आरोप लगे हैं कि फ्लाइओवर के उद्धाटन समारोह में उसकी ओर से दूसरे देशों के राजदूतों के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

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मालदीप पर यह भी आरोप लगा है कि फ्लाइओवर के उद्धाटन स्थल पर केवल चीन के राजदूत की कार को पहुंचने दिया गया। इसपर मालदीव में विपक्ष के प्रवक्ता अहमद महलूफ ने अपने ट्वीट में लिखा, 'श्रीलंका और बांग्लादेश के राजदूतों ने इस कार्यक्रम का बॉयकॉट किया क्योंकि उनकी कारों को यमीन के सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया था और उनसे पैदल जाने को कहा गया।' महलूफ ने लिखा 'केवल चीनी राजदूत की कार को आयोजन स्थल तक आने दिया गया।' यमीन ने 200 मिलियन डॉलर की लागत से बने इस पुल को उनके राजनयिक इतिहास की सबसे बड़ी कामयाबी बताया है।

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ऐसा भी अनुमान है कि एशिया में अपनी धमक बढ़ाने के लिए चीन लगातार चाल रहा है। वह इस कोशिश में है कि एशिया के सारे देश भारत से दूरी बना लें। इसके लिए चीन लगातार नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश जैसे देशों को आर्थिक मदद देने में जुटा है। वहीं भारत के लिए चुनौती है कि वह चीन की इस चाल का जवाब देते हुए पड़ोसी देशों के साथ संबंध बनाए रखें।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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