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जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता घटाने से SC के कई जज नाराज, केंद्र के फैसले का किया विरोध

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 6 , 2018 , 21:13 IST

सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मुलाकात कर जस्टिस के एम जोसेफ की वरिष्ठता को कम करने के केंद्र के फैसले पर अपना विरोध जताया। हालांकी लंबे विवाद के बाद जस्टिस केएम जोसेफ सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश तो नियुक्ति हो गए, लेकिन वह तीन नए जजों में सबसे जूनियर होंगे। मंगलवार को तीनों नए न्यायाधीश शपथ लेंगे। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठताक्रम को देखा जाए तो जस्टिस जोसेफ का नाम जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत शरण के बाद सबसे नीचे है। इस लिहाज से वह सुप्रीम कोर्ट के सबसे जूनियर जज होंगे। उनके कनिष्ठ होने का प्रभाव सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनने और सुनवाई पीठ की अध्यक्षता करने पर भी पड़ेगा।

न्यायाधीश दीपक मिश्रा से मिलकर विरोध जताएंगे

बताया जाता है कि जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता कम करने के फैसले से कई जज नाराज हैं। सूत्रों के अनुसार, ये जज सोमवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा से मिलकर विरोध जताएंगे। सीजेआई से आग्रह करेंगे कि वह मंगलवार को शपथ से पूर्व जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता से जुड़े मामले को सुलझाएं।

जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति विवाद पर अगर निगाह डाली जाए तो सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने गत 10 जनवरी को उनके नाम की सिफारिश सरकार को भेजी थी। सरकार ने कई महीने उसे लंबित रखने के बाद पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया था।

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उनकी वरिष्ठता पर सवाल उठाते हुए सरकार ने कहा था कि हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की ऑल इंडिया वरिष्ठता में वह काफी नीचे हैं। इसके अलावा वे मूलतः केरल हाई कोर्ट से आते हैं और केरल का पहले ही सुप्रीम कोर्ट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। कई ऐसे प्रांत हैं जिनका कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। नाम वापसी के बाद न्यायपालिका में काफी प्रतिक्रिया हुई थी।

मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी भी लिखी थी

कोलेजियम के सदस्य न्यायाधीशों ने इस पर आपत्ति उठाई थी और जस्टिस जे. चेलमेश्वर (अब सेवानिवृत) ने इस बाबत मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी भी लिखी थी। इसके बाद कोलेजियम ने सर्वसम्मति से गत 16 जुलाई को जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश दोबारा भेजी थी।

तय नियमों के मुताबिक, कोलेजियम द्वारा दूसरी बार भेजी गई सिफारिश सरकार पर बाध्यकारी होती है। इसके अलावा उसी दिन एक अलग संस्तुति में कोलेजियम ने मद्रास हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी व उड़ीसा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विनीत शरण को भी सुप्रीम कोर्ट प्रोन्नत करने की सिफारिश की थी। सरकार ने तीनों सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं।

सुप्रीम कोर्ट से शपथ कार्यक्रम के बारे में जारी सर्कुलर के मुताबिक, मंगलवार को जस्टिस जोसेफ का शपथ में तीसरा नंबर है। पहला नाम जस्टिस इंदिरा बनर्जी का है दूसरा नाम जस्टिस विनीत शरण का है। सुप्रीम का सर्कुलर सरकार की ओर से नियुक्ति की वरिष्ठता के अनुसार ही होता है।

विनीत शरण 26 फरवरी 2016 और इंदिरा बनर्जी 5 अप्रैल 2017 को हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनीं

इंदिरा बनर्जी हाई कोर्ट में पांच फरवरी 2002 को नियुक्त हुई थीं। जस्टिस विनीत शरण 14 फरवरी 2002 को हाई कोर्ट में नियुक्त हुए थे और जस्टिस जोसेफ 14 अक्टूबर 2004 को हाई कोर्ट के न्यायाधीश बने थे। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनने में पहले नंबर पर जस्टिस जोसेफ का नाम आता है वे 31 जुलाई 2014 को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हो गए थे जबकि विनीत शरण 26 फरवरी 2016 और इंदिरा बनर्जी पांच अप्रैल 2017 को हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनीं थीं।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरएम लोधा कहते हैं कि वैसे तो कोलेजियम जब प्रोन्नति की सिफारिश करती है तो उसी समय ऑल इंडिया वरिष्ठता देखी जाती है। वही वरिष्ठता का पैमाना होता है। हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनना नहीं। लेकिन फिर भी अगर कोलेजियम ने किसी के नाम की नियुक्ति की सिफारिश पहले की है और किसी की बाद में तो सामान्य तौर पर सरकार पहले की गई सिफारिश को पहले नंबर पर और बाद वाली को बाद में रखती है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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