राजनीति

उपचुनावों में जीत के बाद बोलीं मायावती, मोदी सरकार में बढ़ा दलितों पर शोषण

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 15 , 2018 , 16:35 IST

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर-फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनावों में बीजेपी को औंधे मुँह गिराने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने चंडीगढ़ में बड़ी रैली की। बसपा के संस्थापक रहे कांशीराम का आज जन्मदिन है, इसी मौके पर ये रैली आयोजित की गई थी।

चंडीगढ़ में रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि पंजाब की सरकार ने दलितों और कांशीराम के त्याग को गंभीरता से नहीं लिया है। पंजाब सरकार ने उन्हें नज़रअंदाज कर दिया था।

उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘जब से केंद्र और देश के कई राज्यों में बीजेपी की सरकार बनी है, तभी से आरएसएस के एजेंडे को लागू करने की कोशिश की जा रही है। दलित, मुस्लिम समेत गरीब तबकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। दलितों के खिलाफ हो रही हिंसा के मामलों में तेजी आई है’। उन्होंने हैदराबाद और ऊना की घटना का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि ‘जब मैनें इस बात को राज्यसभा में रखने की कोशिश की तो मुझे बोलने नहीं दिया गया। इसी कारण मैंने राज्यसभा से हीं इस्तीफा दे दिया था। मायावती ने कहा कि बीजेपी दलित विरोधी पार्टी है और सहारनपुर में जो हिंसा हुई उसे जानबूझकर बढ़ावा दिया गया था।

मायावती ने कहा कि आरक्षण को रोकने के लिए प्राइवेटाइजेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। बसपा ने कभी भी पिछड़े समाज को आरक्षण देने का विरोध नहीं किया है, मंडल कमीशन की रिपोर्ट हमारे दबाव के बाद ही लागू की गई थी।

मायावती ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट को लागू नहीं किया था, ये उनकी सोच को दर्शाता है। बसपा ने करीब 6 महीने तक इसके लिए धरना दिया था, जिसके बाद वीपी सिंह सरकार ने उसे लागू किया। कांग्रेस ने लगभग 3 से 4 दशक तक बाबा साहेब अंबेडकर को भारत रत्न नहीं दिया,  काफी समय के बाद वीपी सिंह की सरकार ने ही बाबा साहेब को भारत रत्न दिया था। लेकिन बाद में बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। उन्होंने कहा कि अब बीजेपी पिछड़ों को लुभाने की कोशिश कर रही है। 

यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन की जीत के बाद अब मायावती की कोशिश है कि 2019 में बीजेपी को हराने के लिए सभी विपक्षी दल एक साथ आऐं। गौरतलब है कि 2014 और 2017 में बीजेपी की बड़ी जीत में दलित वोटबैंक का बड़ा हाथ था। दोनों ही चुनावों में बसपा का हाल काफी बुरा रहा था। अब मायावती इस रैली के साथ ही अपने कैडर और दलित वोट बैंक को वापस पाना चाहती है।


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Sourabh

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