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एंटीगुआ सरकार के बयान के बाद विपक्ष का हमला, कहा-मोदी सरकार ने मेहुल चोकसी को भगाया

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 4 , 2018 , 21:47 IST

पंजाब नेशनल बैंक सहित कई बैंकों को हजारों करोड़ों रुपये का चूना लगाकर देश छोड़ कर भागे भगोड़े मेहुल चोकसी को नागरिकता देने पर एंटीगुआ सरकार के बयान के बाद अब मोदी सरकार पर सवाल खड़े होने लगे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।

राहुल ने ट्विटर पर लिखा कि "मिस्टर 56 इंच के सूट-बूट वाले दोस्त (मेहुल) को भारत ने नवंबर 2017 में ही क्लीन चिट दे दी थी ताकि वो एंटीगुआ की नागरिकता हासिल कर सके।" मेहुल चोकसी और नीरव मोदी पर पीएनबी में 13 हजार करोड़ का घोटाला करने का आरोप है। राहुल ने एक वीडियो भी पोस्ट किया। इसमें पहले केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद नीरव मोदी और मेहुल चोकसी मामले में सफाई देते हैं। इसके बाद मोदी की क्लिप है, जिसमें एक कार्यक्रम में वे मेहुल चोकसी को ‘मेहुल भाई’ कहते हैं।

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने साजिश कर बैंकिंग घोटाले के प्रमुख आरोपियों नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को देश से बाहर भगाया।

रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मेहुल को एंटीगुआ की नागरिकता के मामले पर बैठक में चर्चा हुई। सुरजेवाला ने कहा, 'विदेश मंत्रालय ने मई 2017 में मोदी सरकार के इशारे पर मेहुल के मसले पर एंटीगुआ की सरकार की क्लीनचिट दी। बैंकों के भगोड़े और 24 हजार करोड़ के घोटाले करने वाले मेहुल चोकसी को सेबी के द्वारा भी ऐसी ही क्लीनचिट दी गई।'

सुरजेवाला ने कहा, 'मेहुल को इंटरपोल की क्लीनचिट का कारण यह था कि मई 2017 तक सीबीआई या ईडी ने कोई सबूत इंटरपोल को नहीं दिए, जबकि पीएमओ को इनके बारे में 26 मई 2015 को शिकायत मिली थी। 2015 से 2017 के बीच नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के खिलाफ 42 शिकायतें मिलीं। यानी 2015 से 2017 वे पैसा लेकर गबन करते रहे और मई 2017 में मोदी सरकार के विभाग कहते हैं कि उन्होंने कुछ नहीं किया।' सुरजेवाला ने 14 सितंबर 2016 का गुजरात हाई कोर्ट का एक कोर्ट ऑर्डर भी पेश करने का दावा किया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने शनिवार को इस बात पर आश्चर्य जताया कि हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के खिलाफ 2016 से पुलिस जांच चल रही थी, फिर भी वह कैसे देश से भाग गया। चिदंबरम ने इसे लेकर केंद्र सरकार और गुजरात सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम ने कई ट्वीट के जरिए यह भी कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय में एक हलाफनाम दाखिल किया गया था, जिसमें कहा गया था कि चोकसी देश से भाग सकता है।

वही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी शनिवार को मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए एक ट्वीट किया- ''सीबीआई ने लंदन में माल्या के केश को कमजोर किया. चोकसी को भागने में और दूसरे देश की नागरिकता पाने में मदद की और उसके बाद मोदी सरकार प्रत्यर्पण की मांग का नाटक करती है. ये तो देश के साथ गद्दारी है न.'' बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने यह ट्वीट एक समाचार को शेयर करते वक्त किया है.

सवालः

1. PMO को 2015 से 2017 के बीच नीरव, मेहुल के खिलाफ 42 शिकायतें मिलीं।

2. PMO को मिली शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

3. 2016 से जांच जारी, फिर कैसे भागा मेहुल चोकसी?

4.  मेहुल चोकसी को सेबी से क्यों क्लीनचिट दी गई?

5. इंटरपोल को 2017 तक CBI या ED ने कोई सबूत क्यों नहीं दिए?

6. मेहुल चोकसी को पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट कैसे मिली?

7. विदेश मंत्रालय के मुंबई स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफिस ने मंजूरी किसके कहने पर मिली?

भारत के क्लियरेंस के बाद दी गई मेहुल को नागरिकता: एंटीगुआ

एक दिन पहले ही एंटीगुआ सरकार ने कहा था कि हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को नागरिकता देने के लिए भारत की पुलिस ने क्लीयरेंस सर्टिफिकेट दिया था। विदेश मंत्रालय के मुंबई स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफिस ने भी मंजूरी दी थी। हमें चोकसी के खिलाफ ऐसी कोई भी सूचना नहीं दी गई थी जो उसे वीजा या नागरिकता देने के खिलाफ हो। भारत के किसी व्यक्ति या संस्थान ने उसके खिलाफ कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। चोकसी ने मई 2017 में एंटीगुआ की नागरिकता हासिल करने के लिए अर्जी दी थी।

चौकसी ने बयान जारी कर दी थी जानकारी:

चोकसी को पिछले साल नवंबर में एंटीगुआ की नागरिकता मिली थी। वह इसी साल जनवरी में भारत छोड़कर चला गया था। अपने वकील के जरिए दिए गए बयान में चोकसी ने कहा था- "मैंने कानूनी तौर पर एंटीगुआ और बरबूडा की नागरिकता के लिए आवेदन किया था।''

बता दें कि सीबीआई चोकसी के खिलाफ दो मामलों में चार्जशीट दायर कर चुकी है। इसके अलावा मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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