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Merry Christmas 2018: जानिए क्यों और कैसे मनाते हैं प्रभु यीशु का जन्मदिवस

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| दिसंबर 25 , 2018 , 15:47 IST

क्रिसमस हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। यूं तो क्रिसमस क्रिश्चियन धर्म को मानने वाले लोगों का त्योहार है, लेकिन दूसरे धर्म के लोग भी इसे धूम-धाम से मनाते हैं। दूसरे धर्म के लोग भी इस त्योहार को उतने ही जोश के साथ मनाते हैं। हर देश में क्रिसमस का त्योहार अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। ईसाई धर्म के लोग इसे ईसा मसीह के जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं।

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क्रिसमस के मौके पर लोग एक-दूसरे को उपहार देते हैं और चर्च को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। लोग अपने घरों के आंगन में क्रिसमस ट्री बनाकर उसे रंग-बिरंगे खिलौनों से सजाते हैं। गिरजाघरों में यीशु के जन्म से संबंधित झांकियां तैयार की जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि 24 दिसंबर की आधी रात (ठीक 12 बजे) यीशु का जन्म हुआ था इसलिए चर्च में 12 बजे प्रार्थना की जाती है। इसके साथ हीं कैरोल गाए जाते हैं और अगले दिन धूमधाम से त्योहार मनाया जाता है। लेकिन ये बात बहुत कम ही लोग जानते हैं कि क्रिसमस का त्योहार ईसाई धर्म के लोग पूरे 12 दिनों तक मनाते हैं। जानिए 12 दिनों के बारे में:

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  1. 25 दिसंबर: क्रिसमस के पहले दिन से ही इस त्योहार का जश्न शुरू हो जाता है। क्रिश्चियन समुदाय के लोग इस दिन को ईसा मसीह के जन्म दिवस के रूप में मनाते हैं।
  2. 26 दिसंबर: क्रिसमस के अगले दिन यानी 26 दिसंबर को बॉक्सिंग डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को सेंट स्टीफन डे के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि सेंट स्टीफन पहले ऐसे शख्स थे, जिन्होंने ईसाई धर्म के लिए अपनी जीवन की कुर्बानी दी थी।
  3. 27 दिसंबर: क्रिसमस का दूसरा दिन सेंट जॉन को समर्पित किया जाता है। ये ईसा मसीह से प्रेरित और उनके मित्र माने जाते हैं।
  4. 28 दिसंबर: इस दिन को लेकर क्रिश्चियन लोगों की मान्यता है कि किंग हीरोद ने ईसा मसीह को ढूंढते समय कई मासूम लोगों को कत्ल कर दिया था। इस दिन उन्हीं मासूम लोगों को याद कर उनके लिए प्रार्थना की जाती है।
  5. 29 दिसंबर: ये दिन सेंट थॉमस को समर्पित है। 12वीं सदी में चर्च पर राजा के अधिकार को चुनौती देने पर उनका 29 दिसंबर को कत्ल कर दिया गया था। इस दिन क्रिश्चियन समुदाय के लोग उन्हें याद करते हैं।
  6. 30 दिसंबर: इस दिन क्रिश्चियन समुदाय के लोग सेंट ईगविन ऑफ वर्सेस्टर को याद करते हैं।
  7. 31 दिसंबर: पोप सिलवेस्टर ने इस दिन को मनाया था। कई यूरोपियन देशों में न्यू ईयर इव को सिलवेस्टर कहा जाता है। यूके में इस दिन पारंपरिक रूप से गैम्स और खेल-कूद आयोजित किए जाते हैं। इस दिन नए साल से पहले की शाम के रूप में भी मनाया जाता है।
  8. 1 जनवरी: क्रिसमस का आठवां दिन ईसा मसीह की मां मदर मैरी को समर्पित होता है।
  9. 2 जनवरी: इस दिन चौथी सदी के सबसे पहले ईसाई 'सेंट बसिल द ग्रेट' और 'सेंट ग्रेगरी नाजियाजेन' को याद किया जाता है।
  10. 3 जनवरी: क्रिश्चियन धर्म के लोगों की मान्यता है कि इस दिन ईसा मसीह का नाम रखा गया था। इस दिन चर्च में रौनक देखने को बनती है।
  11. 4 जनवरी: 18वीं और 19वीं सदी की सेंट एलिजाबेथ अमेरिका की पहली संत थीं। इस दिन उन्हें याद किया जाता है।
  12. 5 जनवरी: 5 जनवरी क्रिसमस पर्व का आखिरी दिन होता है। इस दिन को एपीफेनी भी कहा जाता है। यह दिन अमेरिका के पहले बिशप सेंट जॉन न्यूमन को समर्पित है।

जानिए ईसा मसीह से जुड़ी 5 बातें:

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  1. ईसाई मान्यताओं के मुताबिक आज से हजारों साल पहले नासरत में गेब्रियल नामक एक स्वर्गदूत ने मरियम को दर्शन दिया और कहा कि तू पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती होगी और एक पुत्र देगी जिसका नाम यीशु रखा जाएगा। बैतलहम में मरियम ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम यीशु रखा गया।
  2. ईसाई धर्म के अनुसार ईसा मसीह परमेश्वर के पुत्र थे। उन्‍हें मृत्‍यु दंड इसलिए दिया गया था क्‍योंकि वो अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए लोगों को शिक्षित और जागरुक कर रहे थे। उस वक्‍त यहूदियों के कट्टरपंथी रब्‍बियों यानी कि धर्मगुरुओं ने यीशु का पुरजोर विरोध किया। कट्टरपंथियों ने उस समय के रोमन गवर्नर पिलातुस से यीशु की शिकायत कर दी। रोमन हमेशा इस बात से डरते थे कि कहीं यहूदी क्रांति न कर दें। ऐसे में कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए पिलातुस ने यीशु को क्रॉस पर लटकाकर जान से मारने का आदेश दे दिया।
  3. मौत से पहले यीशु को ढेरों यातनाएं दी गईं। उनके सिर पर कांटों का ताज रखा गया। इसके बाद यीशु को गोल गोथा नाम की जगह ले जाकर सलीब पर चढ़ा दिया गया।
  4. प्राण त्‍यागने से पहले यीशु ने कहा था, 'हे ईश्‍वर! मैं अपनी आत्‍मा को तेरे हाथों में सौंपत हूं।'
  5. ईसा मसीह कहते हैं कि कभी किसी को नुकसान ना पहुंचाएं। जो लोग दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें नरक में सजा दी जाएगी।


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