नेशनल

नाबालिग के साथ हुए यौन अपराध में सहमति के कोई मायने नहीं : MP HC

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
2064
| अगस्त 13 , 2018 , 14:06 IST

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक बच्ची के साथ हुए रेप के मामले में सेशन कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा है कि,

'सेक्स के लिए नाबालिग की सहमति का कोई मतलब नहीं है।'

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में 26 अप्रैल 2016 को विशेष न्यायाधीश ने आरोपी सूरज प्रसाद देहरिया को रिहा कर दिया था, जिस पर रेप के मामले में आईपीसी और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।

आपको बता दें कि कोर्ट ने सेशन कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए नाबालिग के साथ यौन संबंध को सहमति मानने से इनकार कर दिया है। इससे पहले सेशन कोर्ट ने आरोपी को इस मामले में बरी कर दिया था।

26 अप्रैल 2016 को सिवनी जिला कोर्ट के जज ने आरोपी सूरज प्रसाद देहरिया को संदेह के आधार पर मामले में बरी कर दिया था। सेशन कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट को भी आधार बना कर सूरज प्रसाद को दोषमुक्त कर दिया था। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया था कि विक्टिम के शरीर में किसी तरह की चोट के निशान नहीं मिले। साथ ही इस बात पर भी गौर किया गया कि वारदात के वक्त पीड़िता ने आपत्ति भी नहीं दर्ज कराई। आपसी सहमति से किए गए सेक्स समेत कई अन्य तथ्यों को आधार मानते हुए लोअर कोर्ट ने फैसला दे दिया था।

87

विक्टिम की उम्र का हवाला

मामले में सरकार के द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर की गई और डिविजन बेंच के मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता समेत जस्टिस वीके शुक्ला ने सेशन कोर्ट के इस फैसले को दरकिनार कर दिया। स्कूल एडमिशन रजिस्टर और रेडियॉलजिकल एग्जामिनेशन के मुताबिक लड़की 14 साल से कम उम्र की थी। इस बात पर जजों ने गौर किया और कहा यदि उसने सहमति दे दी है तो भी इसे कॉन्सेंशुअल सेक्स के रूप में नहीं देखा जा सकता है। जजों के मुताबिक, ...

ऐसे पीड़ितों को देखते हुए सहमति का कोई मतलब नहीं है इसलिए धारा 376 आईपीसी के तहत अपराध किया गया है।


कमेंट करें