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मिर्चपुर कांड: 20 को उम्रकैद-97 लोग दोषी, बाप-बेटी को जिंदा जलाने पर मचा था बवाल

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 24 , 2018 , 16:17 IST

मिर्चपुर कांड में दिल्ली हाईकोर्ट ने 97 लोगों को दोषी ठहराए जाने के बाद गांव की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। हरियाणा में वर्ष 2010 में हुए मिर्चपुर कांड में दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। इस मामले में सभी 20 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस मामले में इससे पहले ही दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने 3 लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई थी, शुक्रवार को 17 और लोगों को हाईकोर्ट ने दोषी मानते हुए उम्र कैद की सज़ा सुनाई है।

हाईकोर्ट ने इन सभी को SC/ST एक्ट के तहत सजा सुनाई है। शुक्रवार को अपने फैसले में कोर्ट ने सख्त टिप्पणी में कहा- 'जाट समुदाय ने जानबूझकर बाल्मीकी समुदाय के लोगों पर हमला किया था।'

2011 में 82 आरोपियों को कोर्ट ने किया था बरी

आपको बता दें कि रोहिणी कोर्ट ने 2011 में अपने फैसले में 82 आरोपियों को बरी कर दिया था, जबकि 15 को दोषी बताते हुए कोर्ट ने सजा सुनाई थी। मामले में कुल 97 लोग आरोपी थे। बाकी बचे दंगा भड़काने के 7 आरोपियों को डेढ़ साल की सजा मिली थी और एक वर्ष के प्रोबेशन पर 10-10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया था, जबकि 82 आरोपियों को बरी कर दिया गया था।

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बता दें कि हरियाणा के मिर्चपुर इलाके में अप्रैल 2010 में 70 साल के दलित बुजुर्ग और उसकी बेटी को जिंदा जला दिया गया था, जिसके बाद गांव के दलितों ने पलायन कर लिया था।

254 परिवारों की जिंदगी प्रभावित हुई

ट्रायल के बाद दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने मिर्चपुर कांड में दोषी ठहराए गए 15 आरोपियों में से घर जलाने वाले तीन लोगों को उम्रकैद और आगजनी के पांच दोषियों को पांच-पांच वर्ष कैद समेत 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस वीभत्स मामले में कुल 97 लोग आरोपी थे। बाकी बचे दंगा भड़काने के 7 आरोपियों को डेढ़ साल की सजा मिली थी।

शुक्रवार को कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस घटना से दलितों के 254 परिवारों की जिंदगी प्रभावित हुई। उन्हें अपना सबकुछ छोड़कर पलायन करना पड़ा। शुक्रवार को अपने फैसले में कोर्ट ने सख्त टिप्पणी में कहा- 'जाट समुदाय ने जानबूझकर बाल्मीकी समुदाय के लोगों पर हमला किया।'

2011 में रोहिणी कोर्ट ने अपने फैसले में 82 आरोपियों को बरी कर दिया था, जबकि 15 को दोषी बताते हुए कोर्ट ने सजा सुनाई थी। इसी फैसले को पीड़ित पक्ष ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर शुक्रवार को फैसला आया है।

70 साल के दलित बुजुर्ग और बेटी को जिंदा जलाने का मामला 

अपने फैसले में कोर्ट ने कई और सख्त टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि आजादी के 70 वर्ष के बाद भी दलितों के साथ इस तरह की घटना बेहद शर्मनाक वाक्या है। दलितों के खिलाफ अब भी अत्याचार कम नहीं हुए हैं। अपने फैसले में हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया है कि सरकार इन परिवारों को पुनर्वास प्रदान करे।

गौरतलब है कि अप्रैल, 2010 में हरियाणा (हिसार जिले) के मिर्चपुर क्षेत्र में 70 साल के दलित बुजुर्ग और उसकी बेटी को जिंदा जिला दिया गया था। इसके बाद यह मामला देश भर में सुर्खियां बना था।

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ट्रायल के बाद दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने मिर्चपुर कांड में दोषी ठहराए गए 15 आरोपियों में से घर जलाने वाले तीन लोगों को उम्रकैद और आगजनी के पांच दोषियों को पांच-पांच वर्ष कैद समेत 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस वीभत्स मामले में कुल 97 लोग आरोपी थे। बाकी बचे दंगा भड़काने के 7 आरोपियों को डेढ़ साल की सजा मिली थी।

कैसे और कब हुआ मिर्चपुर कांड

19 अप्रैल 2010 : मिर्चपुर की वाल्मीकि बस्ती में योगेश चौहान के कुत्ते के भौंकने पर कुछ लोगों में मामूली झगड़ा हुआ था।
21 अप्रैल : वाल्मीकि बस्ती पर हमला, एक दर्जन घरों में आग लगाई, ताराचंद वाल्मीकि और उसकी अपाहिज बेटी सुमन की जलने से मौत। हमले के सात आरोपी गिरफ्तार।

24 अप्रैल : मिर्चपुर से वाल्मीकि परिवारों का पलायन, हिसार लघु सचिवालय परिसर में धरना लगाया। पीड़ित परिवारों को मुआवजे के एलान के बाद धरना खत्म। ताराचंद के तीनों बेटों को नौकरी और करीब 25 लाख मुआवजा मिला।

29 अप्रैल : कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने मिर्चपुर का दौरा किया। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार थी।

1 मई : नारनौंद थाना इंचार्ज विनोद काजल गिरतार। दो मई को नायब तहसीलदार जागेराम गिरफ्तार। बाद में जागे राम समेत दस को जांच में क्लीन चिट मिली। पुलिस ने मई से सितंबर तक 103 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

2 जुलाई : 13 सांसदों की संसदीय कमेटी ने मिर्चपुर का दौरा किया। अगस्त महीने में प्रदेश सरकार ने पूर्व जस्टिस इकबाल सिंह जांच आयोग गठित किया।

8 दिसंबर : सुप्रीम कोर्ट ने मिर्चपुर केस को हिसार की अदालत से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने के आदेश दिए। पांच नाबालिगों को छोड़कर बाकी आरोपी हिसार की सेंट्रल जेल से तिहाड़ जेल स्थानांतरित।

15 दिसंबर : अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग की टीम ने मिर्चपुर का दौरा किया।

14 जनवरी 2011 : रोहिणी में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की विशेष अदालत में एडीजे डा. कामिनी लाऊ ने सुनवाई शुरू की। जनवरी 2011 में 100 से अधिक परिवार गांव छोड़ कर कैमरी रोड स्थित तंवर फार्म हाउस पर आए।

31 अक्टूबर 2011 को रोहणी कोर्ट ने 15 लोगों को सजा सुनाई थी। इन 15 में से तीन लोगों को उम्र कैद, पांच को पांच-पांच साल की सजा, सात लोगों को दो-दो साल की सजा हुई थी।इनको 20-20 हजार रुपये जुर्माना हुआ था।

2011 में एक गवाह विक्की की मौत हो चुकी है। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दो सदस्य कमेटी गठित की थी। हिसार के सेशन जज और मुंबई से प्रोफेसर शमीम मोदी थे। अगस्त 2014 में दो सदस्य कमेटी ने पुर्नवास के लिए टाउनशिप बनाने की सिफारिश की थी।

30 जनवरी 2017 को देर रात फिर हो था झगड़ा दो समुदायों में फिर झगड़ा हाे गया था। हमले में शिव कुमार के अलावा सोमनाथ, रोहित, हरप्रीत और गुरमीत को चोट आई थी। वहीं राहुल पुत्र ईश्वर, राहुल पुत्र प्रकाश और संदीप को गुम चोट लगी थी। झगड़े के बाद दलित समुदाय ने मिर्चपुर चौकी में पुलिस को शिकायत की लेकिन उनकी तरफ से कार्रवाई नहीं करने पर लोग भड़क गए थे। हमला होने से डरे दलित समुदाय ने गांव से पलायन की तैयारी कर ली थी। इसके बाद एसपी ने चौकी इंचार्ज का तबादला कर दिया था।

31 जनवरी 2017 को 40 और परिवारों ने कर दिया था गांव से पलायन। इसके बाद पलायन करके आए परिवारों से मंत्री कृष्ण बेदी ने रात को मुलाकात की थी और घायलों को 50 हजार, परिवारों को 25 हजार, एक सरकारी नौकरी, प्रत्येक परिवार को क्वार्टर देने का वादा किया था।

1 फरवरी 2017 को गांव में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य एवं पूर्व राज्यसभा सांसद ईश्वर सिंह पहुंचे। उन्होंने गांव मिर्चपुर में विवाद की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया था। यह कमेटी को दस दिन में रिपोर्ट देने को कहा था। कमेटी में उपायुक्त सहित दो मजिस्ट्रेट को लगाया गया था।

21 अक्टूबर 2017 को हरियाणा के हिसार में हुए मिर्चपुर कांड के पीडि़तों के पुनर्वास संबंधी याचिका पर हरियाणा सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया था कि मिर्चपुर गांव में दलितों को अब कोई खतरा नहीं है। सरकार के कोर्ट में दिए गए हलफनामे से दलित नाराज हो गए थे। दलितों का कहना था कि वे डर के मारे पलायन करके आए थे ना कि रोजगार के लिए।

5 अप्रैल 2018 को सरकार ने बाल्मीकि समुदाय के लोगों के लिए ढंढूर में साढ़े 8 एकड़ जमीन पर 256 लोगों को प्लाट देने की घोषणा की थी।
14 अप्रैल 2018 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने गांव ढंढूर में मिर्चपुर पीड़ितों के लिए चिह्नित की गई जमीन को देखने पहुंचे थे।
7 जुलाई 2018 को मुख्यमंत्री ने गांव ढंढूर में मिर्चपुर पीड़ितों को बसाने के लिए पुनर्वास योजना का शुभारंभ किया।

मैाजूदा सरकार ये सुविधाएं देगी
साढ़े 8 एकड़ में 4 करोड़ 56 लाख रुपये की लागत से आवासीय सुविधाएं दी जाएगी। इस क्षेत्र का नाम दीनदयाल पुरम रखा जाए। इस क्षेत्र में एक पार्क भी विकसित किया जाएगा, जिसका नाम भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क रखा जाएगा।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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