राजनीति

DMK के अध्यक्ष बने करुणानिधि के पुत्र स्टालिन, इन चुनौतियों का करना पड़ेगा सामना

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 28 , 2018 , 13:14 IST

एम.के.स्टालिन को मंगलवार को पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक में निर्विरोध द्रमुक (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) का अध्यक्ष चुना गया। स्टालिन (65) द्रमुक के दूसरे अध्यक्ष हैं। यह पद उनके पिता व पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे एम.करुणानिधि के निधन से खाली हुआ था। उनके दिवंगत पिता एम.करुणानिधि पार्टी के अध्यक्ष के पद पर 49 सालों तक बने रहे।


स्टालिन को परिवार में अपने बड़े भाई एम. के. अलागिरि से जहां चुनौतियों का सामना करना है। वहीं, राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरण भी उनके सामने किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं। करुणानिधि को अपने जीवन काल में ही उत्तराधिकारी स्टालिन और बेटे एम के अलागिरी के बीच संघर्ष से रूबरू होना पड़ा था। स्टालिन के विरोध के चलते करुणानिधि ने 2014 में अलागिरी को पार्टी से पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

अलागिरी अगर नई पार्टी बनाते हैं तो उन्हें स्टालिन के विरोधियों का साथ मिल सकता है। ऐसे में दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में स्टालिन को काफी नुकसान पहुंच सकता है। अलागिरी इसीलिए अपने आपको करुणानिधि के उत्तराधिकारी के तौर पर पेश कर रहे हैं।

वर्षो तक भावी युवराज ही बने रहे एम. के. स्टालिन का आखिरकार द्रमुक का राजा बनना तय हो गया है। दिवंगत द्रमुक नेता एम. करुणानिधि के पुत्र और उनके वास्तविक राजनीतिक वारिस एम. के. स्टालिन का मंगलवार को द्रमुक पद चयन होना लगभग तय है। पार्टी मुख्यालय में द्रमुक की जनरल काउंसिल की बैठक में मंगलवार को औपचारिक तौर पर उनके राजतिलक की औपचारिक घोषणा हो सकती है।

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द्रमुक के दूसरे अध्यक्ष के रूप में स्टालिन का चुनाव निर्बाध तरीके से होने की संभावना है क्योंकि पार्टी के 65 जिलों के सचिवों ने पार्टी के शीर्ष पद के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया है और उनके विरोध में कोई नामांकन नहीं हुआ है। पार्टी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने वाले वह एकमात्र उम्मीदवार हैं।

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उनके दिवंगत पिता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि के बीमार रहने के कारण अधिकांश समय घर में ही बिताने पर स्टालिन को जनवरी 2017 में पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। करुणानिधि के इसी महीने निधन हो जाने के बाद उनको पार्टी अध्यक्ष के रूप में प्रोन्नत करना अनिवार्य हो गया था।

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करुणानिधि के 65 वर्षीय पुत्र के पास पार्टी के कोषाध्यक्ष का पद भी होगा। वरिष्ठ नेता दुरई मुरुगन का उनकी जगह चुना जाना भी तय है क्योंकि उस पद के लिए कोई अन्य उम्मीदवार नहीं है। स्टालिन के बड़े भाई एम. के. अलागिरि जिनको उनके नेतृत्व का विरोध करने को लेकर करुणानिधि ने पार्टी विरोधी कार्य में लिप्त रहने के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था वह उपचुनाव में द्रमुक विरोधी कार्य कर सकते हैं।


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