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केरल के लिए विदेशी मदद स्वीकार करें केंद्र, सीएम विजयन ने कहा- PM से करूंगा बात

icon सतीश कुमार वर्मा | 0
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| अगस्त 23 , 2018 , 16:09 IST

100 सालों की सबसे बड़ी बाढ़ की मार झेल रहे केरल में बचाव का काम अभी भी जारी है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालकर राहत शिविरों में ले जाया गया है। अब पूरा ज़ोर प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने पर है। NDRF, सेना, नेवी की टीमें राहत सामग्री और दवाइयां पहुंचाने में जुटी हैं। कई सरकारी और ग़ैर सरकारी संगठन भी दिन-रात राहत के काम में लगे हैं। केरल में बाढ़ की तबाही से अब तक करीब 370 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। केरल की तबाही में नुकसान भी काफी हुआ है। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने चेनगन्नूर में चलाए जा रहे राहत शिविर का खुद पहुंचकर जायज़ा लिया।

केंद्र की मोदी सरकार ने केरल बाढ़ के लिए विदेशी सहायता स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इस फैसले पर सत्तारूढ़ मार्क्सकवादी कम्युनिस्ट पार्टी और विपक्षी दल कांग्रेस ने नाराजगी जाहिर की है। केरल के राजनीतिक दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार से प्रदेश में राहत कार्य के लिए विदेशी सहायत स्वीकार करने पर दोबारा विचार करने को कहा है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बातचीत करेंगे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा नीति 2016 के अनुसार, विदेशी निधि स्वीकार की जा सकती है, इसलिए इसमें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि यूएई ने खुद सहायता का प्रस्ताव दिया है। यूएई को किसी अन्य राष्ट्र के रूप में नहीं समझा जा सकता है, जैसाकि उनके शासकों ने रेखांकित किया है।” उन्होंने कहा, “भारतीय, खासतौर से केरल के लोगों का उनके राष्ट्र निर्माण में काफी योगदान है।”

केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक कहा कि वे केंद्र सरकार द्वारा बाढ़ पीड़ितों के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की वित्तीय सहायता पर रोक लगाने को लेकर अचंभे में हैं जबकि सरकार ने खुद अभी तक केवल 600 करोड़ रुपये की ही सहायता दी है। इसाक ने कहा, “हमने दो हजार करोड़ रुपये मांगे थे। उन्होंने (केंद्र) हमें केवल 600 करोड़ रुपये ही दिए। मुझे नहीं पता कि वे क्यों अन्य सरकारों की मदद को नकार रहे हैं।”

पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने भी केंद्र द्वारा कथित तौर पर यूएई की मौद्रिक मदद अस्वीकार करने पर हैरानी जाहिर की। चांडी ने मोदी को एक पत्र लिखकर कहा, “मुझे खेद है कि भारत सरकार द्वारा घोषित वित्तीय सहायता निराशाजनक है क्योंकि संकट काफी जटिल है।” उन्होंने कहा कि केरल को संकट से उबरने के लिए समुचित मदद की आवश्यकता है।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने बाढ़ प्रभावित केरल में राहत कार्य के लिए मंगलवार को 10 करोड़ डॉलर (तकरीबन 700 करोड़ रुपये) की मदद की पेशकश की।

उधर, नई दिल्ली में थाइलैंड के राजदूत ने केरल में बाढ़ राहत कार्य के लिए भारत द्वारा विदेशी मदद स्वीकार नहीं करने की बात ट्वीट के माध्यम से कही। चुटिंनटोर्न सैम गोंगस्कडी ने कहा, “अनौपचारिक रूप से यह बताते हुए खेद है कि केरल में बाढ़ राहत के लिए विदेशी मदद स्वीकार नहीं की जा रही है। हमारे दिल में आपके लिए सहानुभूति है, भारत के लोग।”

खबरों के मुताबिक, मालदीव और कतर ने भी राज्य को मदद की पेशकश की है।


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सतीश कुमार वर्मा

लेखक न्यूज वर्ल्ड इंडिया में वेब जर्नलिस्ट हैं

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