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बाढ़-सूखे से निजात दिलाएगा रिवर लिंक प्रोजेक्ट, पहले चरण में जुड़ेंगी केन-बेतवा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 1 , 2017 , 12:25 IST

हर साल बाढ़ और सूखे से जूझ रहे भारत के लिए नरेन्द्र मोदी सरकार एक बड़ा रिलीफ देने जा रही है। अलग अलग राज्यों को बाढ़ और सूखे से निजात दिलाने के लिए मोदी सरकार ने 87 बिलियन डॉलर (करीब 5 लाख करोड़ रुपए) का प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर एक महीने के भीतर काम भी शुरु हो जाएगा। साल 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने देश की नदियों को जोड़े जाने का प्रस्ताव रखा था। इसके असर को जानने के लिए एक कार्यदल का गठन किया गया था।

क्या है नदियों को जोड़ने का प्लान?

- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, नदियों को जोड़ने की योजना के पहले फेज को मोदी सरकार मंजूरी दे चुकी है। प्लान के तहत गंगा समेत देश की 60 नदियों को जोड़ा जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि ऐसा होने के बाद किसानों की मॉनसून पर निर्भरता कम हो जाएगी और लाखों हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई हो सकेगी।
- नदियों को जोड़ने से हजारों मेगावॉट बिजली पैदा होगी।

 

नदी जोड़ो योजना के पहले फेज में क्या होगा?

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से को कवर करने वाली केन और बेतवा नदी को पहले चरण में आपस में जोड़ा जाएगा। 
- केन नदी पर एक डैम बनाया जाएगा। 22 किमी लंबी नहर के जरिए केन को बेतवा से जोड़ा जाएगा। 
- बीजेपी नेता संजीव बालियान के मुताबिक, "हमें रिकॉर्ड वक्त में क्लीयरेंस मिल गया है। अंतिम दौर का क्लीयरेंस भी इस साल के अंत तक मिल जाएगा। केन-बेतवा लिंक सरकार की प्राथमिकता है।"
- पहले चरण में सरकार पार-तापी को नर्मदा और दमन गंगा के साथ जोड़ने की तैयारी कर रही है।
- अफसरों का कहना है कि ज्यादा पानी वाली नदियों मसलन गंगा, गोदावरी और महानदी को दूसरी नदियों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए इन नदियों पर डैम बनाए जाएंगे और नहरों द्वारा दूसरी नदियों को जोड़ा जाएगा। 

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पुराना है नदियों को जोड़ने का प्लान 


- भारत की सारी बड़ी नदियों को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव पहली बार इंजीनियर सर आर्थर कॉटन ने 1858 में दिया था। 


- कॉटन इससे पहले कावेरी, कृष्णा और गोदावरी पर कई डैम और प्रोजेक्ट बना चुके थे। लेकिन तब के संसाधनों के बूते से बाहर होने के चलते यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।


- 1970 में तब इरिगेशन मिनिस्टर रहे केएल राव ने एक नेशनल वॉटर ग्रिड बनाने का प्रस्ताव दिया। राव का कहना था कि गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों में ज्यादा पानी रहता है जबकि मध्य और दक्षिण भारत के इलाकों में पानी की कमी रहती है। लिहाजा उत्तर भारत का अतिरिक्त पानी मध्य और दक्षिण भारत तक पहुंचाया जाए। केंद्रीय जल आयोग ने इस योजना को तकनीकी रूप से अव्यावहारिक बताते हुए खारिज कर दिया।


- इसके बाद नदी जोड़ परियोजना की चर्चा 1980 में हुई। एचआरडी मिनिस्ट्री ने एक रिपोर्ट तैयार की थी। नेशनल परस्पेक्टिव फॉर वॉटर रिसोर्सेज डेवलपमेंट नामक इस रिपोर्ट में नदी जोड़ परियोजना को दो हिस्सों में बांटा गया था- हिमालयी और दक्षिण भारत का क्षेत्र।


- 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने नदी जोड़ परियोजना के बारे में प्रपोजल रखा गया। केंद्र ने नदियों को आपस में जोड़ने की व्यावहारिकता परखने के लिए एक कार्यदल का गठन किया। इसमें भी परियोजना को दो भागों में बांटने की सिफारिश की गई। पहले हिस्से में दक्षिण भारतीय नदियां शामिल थीं जिन्हें जोड़कर 16 कड़ियों की एक ग्रिड बनाई जानी थी। हिमालयी हिस्से के तहत गंगा, ब्रह्मपुत्र और इनकी सहायक नदियों के पानी को इकट्ठा करने की योजना बनाई गई। 2004 में यूपीए सरकार आने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

 

 और सूखे के खिलाफ 5 लाख करोड़ का नया प्रोजेक्ट


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