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पढ़िए डॉन के नाम मोनिका का ख़त, छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए, ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए....

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 7 , 2017 , 17:37 IST

मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को उम्रकैद की सजा सुनायी गयी है। सजा मिलने के बाद एक बार फिर अबू सलेम चर्चा में हैं। उसके चर्चा में आते ही एक और शख्स की याद लोगो को आ जाती हैं, जी हाँ एक बार फिर अबू सालेम की गर्लफ्रेंड मोनिका बेदी का नाम चर्चा में शामिल हो गया हैं। कई ऐसे किस्से है जो लोग भुला नहीं सकते हैं एक वक्त था जब अबू सलेम ने अपनी हरकतों से बॉलीवुड की गलियों में भी खलबली मचा दी थी। बॉलीवुड एक्ट्रेस मोनिका बेदी की बात करें तो एक समय वह अबू सलेम के दिल पर राज करती थीं।

यहां तक की भारत से भागने के बाद मोनिका कई सालों तक अबू सालेम के साथ रही थी। पहली मुलाकात में एक स्‍टेज शो के दौरान मोनिका बेदी और अबु सलेम की मुलाकात हुई थी। मोनिका पहले दिन से ही अबू सलेम की बातों से इम्प्रेस हो चुकी थी। अबू सलेम और मोनिका  बेदी अमेरिका के न्‍यू जर्सी शहर से पुर्तगाल पहुंचे थे, जहां भारत के आग्रह पर पुर्तगाली अधिकारियों ने दोनों पर शिकंजा कसा था और दोनों को हिरासत में लिया गया था।

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स्टेज शो के दौरान अबु ने खुद को कारोबारी बताया था। मोनिका ने एक साक्षात्कार में बताया था कि स्टेज शो के पहले अबु नाम बदलकर बातें किया करता था लेकिन उसके बात करने का अंदाज ऐसा था कि पहली मुलाकात से पहले ही अबू को वह पसंद करने लगी थीं। मोनिका और अबू के बीच फोन पर घंटों बातें हुआ करतीं थीं। मोनिका ने कहा था कि मैं ये नहीं कहूंगी कि मैं उसके प्यार में पड़ गयी थी, लेकिन हां, ये जरूर है कि मैं उसे पसंद करने लगी थी।

खबरों के मुताबिक अबू सलेम ने मोनिका को बड़ी फिलमें दिलवाने के लिए सिफारिश भी की थी।अबू सलेम की गिरफ्तारी के बाद मोनिका ने अपने जीवन के कड़वे अनुभवों के आधार पर एक पत्र में एक शायरी लिखी थी... छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए, ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए, प्यार से भी जरूरी कई काम हैं, प्यार सब कुछ नहीं जिंदगी के लिए.... आपको बता दें कि मोनिका को फर्जी पासपोर्ट के लिए सजा हुई थी। मोनिका बेदी अपने हिस्से की सजा काटकर परदे पर कमबैक कर चुकी हैं।

फिल्मफेयर.कॉम और इंडिया-फॉरम्स डॉट कॉम में छपे इंटरव्यू में मोनिका ने खुद अपनी और अबु की लव स्टोरी पर खुलकर बात की थी। मोनिका एक एक्ट्रेस हैं, इसलिए स्टेज शो के ऑफर में उनकी दिलचस्पी स्वाभाविक थी। मोनिका के मुताबिक, उन्होंने अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील का नाम तो सुना था लेकिन अबु सलेम के नाम से वाकिफ नहीं थी। 1998 में मोनिका पहली दफा फोन पर अबु सलेम के संपर्क में आईं।मोनिका दुबई में थीं, फोन पर उन्हें दुबई में एक स्टेज शो करने का ऑफर मिला था। स्टेज शो के दौरान अबु ने खुद को एक कारोबारी बताया था। शो के पहले अबु नाम बदलकर बातें करता था। लेकिन उसके बात करने का अंदाज ऐसा था कि पहली मुलाकात से पहले ही वो उसे पसंद करने लगी थीं। मोनिका की मानें तो फोन पर हमारी बातें होती थीं लेकिन मुझे लगता था कि कहीं न कहीं हम-दोनों के बीच कोई कनेक्शन जरूर है।मोनिका बताती हैं कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि किसी शख्स से फोन पर बातें करते-करते मैं उसे इस कदर पसंद करने लगूंगी कि बिना बात के रहा नहीं जाएगा। मैं ये नहीं कहूंगी कि मैं उसके प्यार में पड़ गई थी, लेकिन हां, ये जरूर है कि मैं उसे पसंद करने लगी थी। इतना कि पूरे दिन मैं उसके फोन का बेसब्री से इंतजार करने लगी थी। और जब फोन नहीं आता तो मैं व्याकुल हो उठती थी। फोन पर बात करने के दौरान अबु मुझे बहुत ही संजीदा और सुलझे हुए इंसान लगे, उनसे बातें करके लगता था कि जैसे वो बहुत ही क्लोज फ्रेंड हैं। मैं उनसे फोन पर अपनी सारी बातें शेयर करने लगी थी। दुबई में शो के बाद हम दोनों इतने करीब आ गए कि अबु हर आधा घंटे में मेरा फोन लगा देते थे। वो मेरी काफी परवाह करने लगे थे। दुबई में दो बार मिलने के बाद मैं मुंबई वापस आई तो मैंने अबु को मुंबई आने के लिए कहा। लोकिन वो हमेशा कोई बहाना बना देते। अबु ने मुझे अपना नाम आर्सलन अली बताया था। अबु हमेशा यही नाम इस्तेमाल करते थे।यहां तक कि जब पुर्तगाल में हम गिरफ्तार हुए तब भी अबु ने अपना नाम आर्सलन अली बताया था। अबु नहीं चाहता था कि मैं दुबई से वापस मुंबई जाऊं। इसलिए जब मैं मुंबई में थी तो अबु ने मुझे दुबई आने के लिए फोन किया और कहा कि अगर मुंबई में रहूंगी तो परेशानी में पड़ जाऊंगी। जब मैं दुबई पहुंच गई तो उसने मुझसे कहा कि तुम अब वापस नहीं जाओगी। उसने कहा कि अगर तुम वापस गई तो पुलिस तुमसे मेरे बारे में जानकारियां मागेगी। मुझे लगा था कि दो हफ्ते में वापस मुंबई लौट आऊंगी।अबु को दुनिया कैसे भी जानती हो, लेकिन मैं जब तक उसके साथ रही, वो मेरे लिए एक आम इंसान की तरह था। वह मेरे साथ अच्छे से पेश आता था। उसने मुझे कभी भी उसके पीछे के स्याह सच से वाकिफ नहीं होने दिया। मैंने हमेशा उसे जरूरतमंदों की मदद करते हुए देखा। मुझे उसके बीते हुए कल के बारे में कुछ भी पता नहीं था। मुझे नहीं पता था कि उसने क्या गलत किया। हम दोनों के बीच एक बहुत ही निजी संबंध था। वो किस किससे जुड़ा था मुझे उससे कुछ भी लेना-देना नहीं था। मैं उसके अलावा किसी से नहीं मिली।शुरुआती दिनों में मुझे नहीं पता था कि वो किस तरह का आदमी है, बस उसकी बातें दिल को छू जाती थीं। मैं पहली दफा उसके साथ दो-तीन दिन रहकर मुंबई वापस आई तब भी मेरे साथ उसका अच्छा बर्ताव ही था। लेकिन जब मैं उसके साथ रहने लगी तब मुझे अहसास हुआ कि हम एक-दूसरे के लिए नहीं बने हैं। मुझे अहसास हुआ कि हम दोनों की सोच-समझ अलग है। तब मुझे लगा कि मैं उसके साथ नहीं रह पाऊंगी लेकिन वो समझने को तैयार ही नहीं था। और फिर वो मनहूस तारीख 18 सितंबर 2002 थी जब हम पुर्तगाल में गिरफ्तार हुए और अलग भी।


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