लाइफस्टाइल

ज्यादा या कम सोना सेहत के लिए हानिकारक, हो सकता है ब्रेन स्ट्रोक

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 3 , 2018 , 18:16 IST

वैसे तो निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन अत्यधिक लंबी नींद की अवधि और हृदय स्वास्थ्य के बीच एक संबंध प्रतीत होता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से रात में 9 या अधिक घंटे तक सोते हैं उनके दिल की धमनी की भित्तियों में अधिक कैल्शियम बनता है और नियमित तौर पर 7 घंटे सोने वालों की तुलना में उनकी पैर की धमनियां अधिक कठोर हो जाती हैं। लंबे समय तक दिन में सोना या फिर रात में अधिक समय तक सोने की समस्या एक विकार से संबंधित है जिसे हाइपर्सोमनिया कहा जाता है। स्लीप एप्निया, जो अक्सर मोटापे से संबंधित होता है, उच्च रक्तचाप, दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है।

वही एक तरफ कम नींद लेना (रात में 6 घंटे से भी कम सोना) विशेष रूप से आपके दिल के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। नींद की कमी से ग्रस्‍त लोगों में स्‍ट्रेस हॉर्मोन बढ़ जाता है। यह सीआरपी नामक कार्डियोवस्क्युलर बीमारी का एक प्रमुख कारण है। रात 10 बजे से सुबह 3 बजे के बीच का समय वह समय होता है जब शरीर की अधिकतम कार्य प्रणाली की मरम्मत होती है। जब आप इस सुनहरे वक्‍त के दौरान नींद नहीं लेते तब ऑक्सिडेटिव यानी उपचय क्षति होती है जिससे इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ जाता है। ऐसे में कार्सिनोजेनेसिस यानी कैंसरकारी ब्रेन स्ट्रोक और दिल के दौरे की संभावना बढ़ जाती है। अमेरिकन हार्ट असोसिएशन के एक हालिया बयान के मुताबिक, अनियमित नींद की दिनचर्या, मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोरोनरी सहित कई कार्डियोवस्क्युलर जोखिमों से जुड़ी है।

मोटापा भी है नींद की कमी की एक वजह

दिल की बीमारी और नींद की कमी को जोड़ने के लिए एक अन्य क्रियाविधि में मोटापा भी शामिल है। इस बात के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं कि अपर्याप्त नींद वजन बढ़ाने से भी जुड़ी है। एक सिद्धांत यह है कि कम नींद लेने वाले सामान्‍यत अधिक नाश्ता लेते हैं और अधिक आहार का भी सेवन करते हैं। इसके अलावा, अपर्याप्त नींद विभिन्न मस्तिष्क प्रणालियों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसमें ऊर्जा ग्रहण करना, निर्णय लेना और भोजन के पसंद को नियंत्रित करने वाली तंत्रिकाएं शामिल हैं। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि नींद की समस्‍या से ग्रस्‍त लोग कम सब्जी खाते हैं और मीठे, वसायुक्‍त खाद्य पदार्थों की ओर उनका झुकाव अधिक रहता है।

अनिद्रा की वजह से हो सकती है कई समस्या

हाई बीपी, कार्डियोवस्क्युलर बीमारी के लिए एक अन्य प्रमुख जोखिम कारक है। कभी-कभी अनिद्रा को इसके लिए जोखिम कारक के रूप में भी देखा जा सकता है। अनिद्रा यानी मुश्किल से नींद आना या बिना सोये रहना, किसी न किसी बिंदु पर लोगों के एक तिहाई जीवन को प्रभावित करती है। इसके अलावा अनिद्रा से ग्रस्‍त कुछ लोग अतिसंवेदनशील स्थिति में रहते हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक अवस्था है और अनिद्रा के शिकार लोग चिंता और चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं। यह रक्तचाप की समस्याओं को भी बढ़ा सकता है।

बार-बार नींद आना भी एक खतरनाक बीमारी है

वही एक तरफ यह भी है कि अगर आपको बार-बार नींद आती है तो भी यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है। केवल थके हुए महसूस करने की बजाय हाइपरसोमनिया से ग्रस्‍त लोग पूरे दिन या तो बार-बार नींद की आगोश में जाते रहेंगे या फिर अनुचित समय जैसे काम के दौरान या फिर बातचीत के दौरान भी नींद में रहेंगे। इाइपरसोमनिया से ग्रस्‍त लोग सोने के बाद भी तरोताजा महसूस नहीं करते और अक्सर परेशान महसूस करते हैं। इसके लक्षणों में चिंता, बेचैनी, भूख की कमी और स्मृति समस्याओं के साथ ही सामाजिक व्‍यवहार में अक्षमता भी शामिल है।

अच्‍छी नींद के लिए कुछ बुनियादी बातों का ध्‍यान रखें

- रोज एक निश्चित समय पर सोएं और निश्चित समय पर उठें
- अपने बेडरूम के वातावरण को शांत, अंधकारपूर्ण और आरामदायक रखें
- किसी तनावपूर्ण घटना, अवसाद या चिंता विकार की वजह से नींद न आ रही हो तो अपने चिकित्सक से इस बारे में बात करें।
हमें स्वस्थ रखने के लिए, नींद की अवधि जो न तो बहुत कम होनी चाहिए और ना ही बहुत लंबी महत्वपूर्ण हो सकती है।


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